सोमवार, 18 अक्तूबर, 2004 को 00:52 GMT तक के समाचार
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने ग़ज़ा में बसे यहूदियों की यह माँग ठुकरा दी है कि यहूदी बस्तियों को वहाँ से हटाने के मसले पर जनमत संग्रह कराया जाए.
इस बारे में विचार करने के लिए प्रधानमंत्री शेरॉन के कार्यालय में हुई एक बैठक कटुता के वातावरण में समाप्त हो गई और ग़ज़ा के यहूदियों ने कहा कि शेरॉन का रवैया शर्मनाक था.
ग़ज़ा के यहूदियों के एक प्रतिनिधि ने कहा कि प्रधानमंत्री देश को विभाजित करने पर उतारू हैं.
शेरॉन की योजना के अंतर्गत ग़ज़ा की बस्तियों के सभी 8000 यहूदियों को और पश्चिमी तट की चार यहूदी बस्तियों को अगले साल तक हटा लिया जाएगा. शेरॉन ने कहा है कि इस क़दम से इसराइल की सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत होगी.
विवादास्पद फ़ैसला
जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिले हैं कि अधिकतर इसराइली शेरॉन की योजना का समर्थन करते हैं लेकिन शेरॉन इस मसले पर जनमत संग्रह या जल्दी आम चुनाव कराने के लिए राज़ी नहीं हैं. उनका कहना है कि ऐसा करने से बस्तियों को हटाने के काम में देरी होगी.
इस मसले पर 25 अक्तूबर को संसद में मतदान होने वाला है और शेरॉन इस पर संसद की सहमति लेने की कोशिश करेंगे.
येरूशलम से बीबीसी की संवाददाता बार्बरा प्लेट् का कहना है कि शेरॉन अपनी योजना की स्वीकृति के लिए सभी कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं.
ग़ज़ा में तेरह लाख फ़लस्तीनी रहते हैं और इसराइल ने सन् 1967 से ग़ज़ा पर क़ब्ज़ा कर रखा है.
शेरॉन ने ग़ज़ा से हटने की योजना के बारे में इसी साल के शुरू में घोषणा की थी. उसके बाद वे पहली बार ग़ज़ा के यहूदियों से रविवार को मिले.
बीबीसी संवाददाता ने कहा है कि ग़जा के यहूदियों को लगता है कि उनके सबसे बड़े समर्थक ने ही उनके साथ विश्वासघात किया है.
उन्होंने इस आशा के साथ शेरॉन को पिछले आम चुनावों में वोट दिए थे कि शेरॉन फ़लस्तीनी ज़मीन पर अवैध रूप से बनाई गई बस्तियों को कभी नहीं हटवाएँगे.
ग़ज़ा के यहूदियों ने चेतावनी दी है कि अगर शेरॉन जनमत संग्रह से इनकार करते हैं तो एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
ग़ज़ा के यहूदियों के प्रवक्ता येहोशुआ मोर-योसेफ़ ने कहा "हम अड़ियल प्रधानमंत्री से मिले हैं. वे हमारे किसी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार नहीं थे."
ग़ज़ा के यहूदियों के संरक्षक संगठन येशा परिषद ने कहा है कि वह जनमत संग्रह के लिए सरकार पर दबाव बनाए रखेगी.
शुक्रवार को फ़लस्तीनी इलाक़ों में बसे कई हज़ार यहूदियों और उनके समर्थकों ने शेरॉन की योजना का विरोध करने के लिए सारे इसराइल में प्रदर्शन किए थे.