मंगलवार, 21 सितंबर, 2004 को 13:11 GMT तक के समाचार
सुशील झा
बीबीसी हिंदी सेवा
ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का सर्मथन किया है लेकिन भारत के लिए इस प्रभावशाली कुर्सी की राह अब भी आसान नहीं है.
भारत कई सालों से सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता की दावेदारी करता रहा है.
जनसंख्या के आधार पर भारत विश्व में दूसरे नंबर पर है तो क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवां बड़ा देश है.
1998 के परमाणु परीक्षणों के पीछे भी कहीं न कहीं प्रभावशाली शक्ति बनने या कहें कि सुरक्षा परिषद में शामिल होने की मंशा भी थी क्योंकि सुरक्षा परिषद के सभी स्थाई सदस्य परमाणु शक्ति संपन्न हैं.
लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत परीक्षण कर दिक्कतें पैदा कर दीं. इतना ही नहीं, ब्रिटेन के समर्थन के बाद पाकिस्तान ने भारत के दावे का औपचारिक विरोध भी कर दिया है.
अड़चनें
भारत की दावेदारी में पाकिस्तान अकेला अड़चन नहीं है. भारत के अलावा जर्मनी, जापान और ब्राजील की दावेदारी मज़बूत है.
इन चारों देशों के बीच “एक दूसरे को सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के मामले पर समर्थन” देने का समझौता हो चुका है.
एशिया में भारत का मुक़ाबला जापान से है जो संयुक्त राष्ट्र को भारी आर्थिक मदद देता है. जापान ने संयुक्त राष्ट्र के कई शांति अभियानों (नव्बे के दशक में खाडी क्षेत्र और कंबोडिया और 2003 में पूर्वी तिमोर) में हिस्सा लिया है.
अमरीका के साथ न केवल जापान के संबंध बेहतर हैं बल्कि प्रौद्योगिकी और व्यापार के क्षेत्र में जापान काफी आगे है. केवल सैन्य दृष्टि से उसे कमज़ोर कहा जा सकता है.
दावेदार
यूरोप में भारत को जर्मनी टक्कर देता है. विश्व की उभरती हुई शक्तियों में जर्मनी आगे है लेकिन इराक़ युद्ध के बाद अमरीका के साथ उसके संबंध ख़राब हुए हैं.
इतना ही नहीं, फ्रांस और जर्मनी के बीच एक अनचाही सी प्रतिद्वंद्विता अब भी बनी हुई है. यूरोप से वैसे भी दो देश सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य हैं.
इसके अलावा, अगर द्वितीय विश्व युद्ध का हवाला दिया जाए तो जर्मनी और जापान अब भी “दुश्मन देश” की श्रेणी में आते हैं.
कुछ जानकारों के अनुसार ब्राजील की दावेदारी काफी मज़बूत है क्योंकि कोई भी लातिन अमरीकी देश सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य नहीं है. विकासशील देशों में ब्राजील की साख है और उसे अमरीका का अच्छा पड़ोसी भी माना जा सकता है.
वैसे कई बातें हैं जो भारत के पक्ष में जाती हैं, भारत पूरे विश्व को एक बड़ा बाज़ार भी उपलब्ध कराता है. संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भी उसकी भागेदारी रही है और भारत की छवि विश्व भर में एक शांतिप्रिय देश की रही है.
फ्रांस, ब्रिटेन और रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तीन ऐसे स्थाई सदस्य हैं जो भारत के दावे का समर्थन करते हैं लेकिन अमरीका और चीन भारत की दावेदारी का समर्थन नहीं करते.