बुधवार, 15 सितंबर, 2004 को 10:04 GMT तक के समाचार
इराक़ के दौरे पर गए ब्रितानी सेनाध्यक्ष जनरल माइक जैकसन ने कहा है कि वहाँ चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार जनवरी में हो सकते हैं.
उन्होंने बग़दाद में बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा कि "अगर पर्याप्त प्रयास किए गए तो जनवरी में चुनाव कराना संभव हैं."
जनरल जैकसन ने कहा कि उनके सैनिकों का मनोबल ऊँचा है और इन बातों में कोई सचाई नहीं है कि ब्रितानी सैनिक ज़रूरत होने पर भी सख़्त कार्रवाई करने से हिचकते हैं.
जनरल जैकसन ने कहा कि यह मान लेना ग़लत होगा कि हिंसा में तेज़ी आई है, हिंसा उतनी ही जितनी कुछ समय पहले थी.
हिंसा
जनरल जैकसन के दौरे के ठीक पहले मंगलवार को बग़दाद में हुए एक कार बम विस्फोट में 47 इराक़ियों की मौत हो गई थी.
वहीं ताज़ा संघर्ष में पश्चिमी शहर रमादी में अमरीकी मरीन सैनिकों और विद्रोहियों के बीच संघर्ष में 10 इराक़ी मारे गए हैं और छह अन्य घायल हो गए हैं.
वहीं इराक़ी पुलिस का कहना है कि सिर कटे हुए तीन लोगों के शव बग़दाद के उत्तर में सड़क के किनारे पाए गए हैं. उन लोगों की पहचान नहीं हो पाई है जबकि अमरीकी सेना के अनुसार वे अरब मूल के लगते हैं.
इन सबके साथ देश में सुरक्षा की स्थिति दिन प्रति दिन बिगड़ ही रही है.
इस बातचीत में अमरीकी सेना की ओर से हाल ही में जारी वह बयान मुख्य रहेगा जिसके अनुसार चुनाव लायक़ माहौल बनाने के लिए इस साल के अंत तक इराक़ में शांति स्थापित कर ली जाएगी.
उधर मंगलवार को पुलिस थाने के बाहर नौकरी के लिए लाइन लगाकर खड़े लोगों की कार बम विस्फोट में मौत के बाद अब भी उस हाइफ़ा स्ट्रीट से मलबा साफ़ किया जा रहा है.
पिछले छह महीने में बग़दाद में हुआ ये सबसे भयंकर विस्फोट था.
हालात पर चर्चा
दोनों इस बात पर चर्चा करेंगे कि बसरा में मौजूद ब्रितानी सैनिकों के लिए काम कितना मुश्किल हो रहा है तो वहीं अमरीका के सामने पूरे देश में कैसी चुनौती बनी हुई है.
मोर्टार और रॉकेटों के ज़रिए इराक़ी और अमरीकी ठिकानों को निशाना बनाने की घटनाएँ बढ़ रही हैं.
सुन्नी मुसलमान चरमपंथी, शिया विद्रोही, सद्दाम हुसैन के शासन के बचे हुए लोग और अमरीकी सेना के इराक़ में रहने से नाराज़ लोग इराक़ी पुलिस ठिकानों और अमरीकी काफ़िलों को निशाना बना रहे हैं.
अमरीकी सैनिक प्रमुखों ने संकल्प व्यक्त किया है कि फ़लूजा जैसे चरमपंथियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों में नए हमले किए जाएँगे.
इस साल के अंत तक ये काम पूरा कर लिया जाना है जिससे अगले साल जनवरी में होने वाले चुनाव सामान्य ढंग से हो सकें.
मगर हर महीने लगभग 60 अमरीकी मारे जा रहे हैं और अब तो हमलों में आ रही तेज़ी के बाद ये हमले और बढ़ भी सकते हैं.