मंगलवार, 14 सितंबर, 2004 को 09:40 GMT तक के समाचार
इसराइल की सुरक्षा कैबिनेट ने ग़ज़ा पट्टी की बस्तियाँ छोड़ने वाले यहूदियों को इसके एवज में धन देने की नीति को मंज़ूरी दे दी है.
बताया जा रहा है कि ये धन प्रति परिवार पाँच लाख डॉलर से भी अधिक हो सकता है. जो लोग बस्तियाँ छोड़ने के लिए राज़ी हो जाते हैं उन्हें अगले ही हफ़्ते इस राशि का कुछ हिस्सा दिया जा सकता है.
ये क़दम ग़ज़ा और पश्चिमी तट से सभी बस्तियाँ हटाने की इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की योजना का हिस्सा है.
हज़ारों लोगों ने इस क़दम के विरोध में दो दिन पहले ही प्रदर्शन किया था जबकि कैबिनेट में इस बात का दबाव बढ़ रहा है कि इस योजना पर जनमतसंग्रह करवाया जाए.
प्रभावशाली वित्त मंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की जनमतसंग्रह की माँग शेरॉन ने सोमवार को ख़ारिज कर दी थी.
शेरॉन ने एक इसराइली अख़बार को दिए साक्षात्कार में कहा कि ये मुद्दा एजेंडे पर ही नहीं है.
रोडमैप पर अमल
उनका कहना था, "इसका असली मक़सद योजना के लागू होने में देर करना है. बस्तियाँ हटाने की योजना बिना किसी देर के शुरू की जाएगी और उन्हीं तारीख़ों के आधार पर होगी जो हमने तय की हैं. कैबिनेट ने जो फ़ैसला किया है हम उससे एक दिन भी अलग नहीं हो सकते."
शेरॉन ने इस साक्षात्कार में इस बात का संकल्प था कि फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात को इसराइल की सुविधा के अनुसार बाहर निकाला जा सकता है बल्कि शेरॉन ने तो उनकी हत्या की संभावित कोशिशों का भी संकेत दिया.
उनका कहना था, "हम जैसे अन्य हत्यारों के विरुद्ध काम करते हैं उसी तरह हम अराफ़ात के विरुद्ध भी करेंगे."
लगातार हो रहे सर्वेक्षण दिखा रहे हैं कि ग़ज़ा से हटने की प्रधानमंत्री की योजना का अधिकतर इसराइली समर्थन कर रहे हैं.
मगर बस्तियों के संगठनों ने इस योजना का ज़बरदस्त विरोध किया है.
अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के अनुसार ग़ज़ा और पश्चिमी तट में यहूदियों की बस्तियाँ अवैध हैं और रोडमैप नाम से आए अंतरराष्ट्रीय शांति प्रस्ताव के तहत इसराइल ने इन इलाक़ों में बस्तियों का काम पूरी तरह रोक देने का संकल्प किया है.
ग़ज़ा पट्टी की 21 बस्तियों में लगभग 8,000 यहूदी रहते हैं.