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बुधवार, 25 अगस्त, 2004 को 11:47 GMT तक के समाचार

गाँधी की लीक पर उनके पौत्र

इसराइली जेलों में बंद फ़लस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए महात्मा गाँधी के पोते अरुण गाँधी इसराइली कब्ज़े वाले क्षेत्र में जाकर एक दिन का उपवास रखने वाले हैं.

बीबीसी से विशेष बातचीत में अरुण गाँधी ने कहा कि इसराइल-फ़लस्तीन के बीच संघर्ष की समाप्ति के लिए जो वातावरण बनना चाहिए वो इसराइल बनने नहीं दे रहा है.

गाँधी ने कहा कि इसराइली कोई ऐसा काम करते हैं जिसकी प्रतिक्रिया फ़लस्तीनियों की ओर से होती है और स्थिति बिगड़ जाती है.

उनका कहना था, "फ़लस्तीनी राजनीतिक क़ैदियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए मैं शुक्रवार 27 अगस्त को उपवास रखूँगा."

उन्होंने कहा, "यदि इसराइल 1967 की सीमा पर लौट जाए तो मामला सुलझ सकता है. इसराइल हमेशा यही चाहता है कि वह फ़लस्तीनियों को हटाकर पूरे देश पर क़ब्ज़ा कर ले."

अरुण गाँधी का कहना था कि इस पूरे मामले में राजनीति घुस गई है और वे राजनेता नहीं चाहते कि मामला हल हो.

'लोगों को शिक्षा मिलेगी'

फ़लस्तीनी शांति संगठनों का कहना है कि अरुण गाँधी का ये उपवास और अभियान इसराइल की सुरक्षा दीवार के विरोध में है और इससे लोगों को 'इसराइली अतिक्रमण' का अहिंसक विरोध करने के बारे में शिक्षा मिलेगी.

अरुण गाँधी रास्ते में जॉर्डन में भी रुके और वहाँ उन्होंने एक बयान जारी करके हर शांति प्रेमी से अपील की कि वे उस दिन उपवास रखें.

उनके सहयोगियों का कहना है कि वह रामल्ला में उपवास रखेंगे और उसी दिन वहीं फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात से भी मिलेंगे.

जॉर्डन से फ़लस्तीन की ओर रवाना होते समय गाँधी ने फ़लस्तीनियों से अपील की कि वे अधिकार पाने के लिए महात्मा गाँधी की ही तरह अहिंसक तरीक़े अपनाएँ.

उधर फ़लस्तीनी शांति समूहों की ओर से टेरी बोलाटा ने कहा, "अहिंसा के गाँधी जी के सिद्धांत फ़लस्तीनियों के लिए नए नहीं हैं."

अरुण गाँधी दक्षिण अफ़्रीका में ही पले-बढ़े हैं.

उनका कहना था कि ये मामला दो दिन में तो नहीं सुलझ सकता मगर यदि कोशिश हो तो कुछ दिन में ज़रूर सब सुलझ जाएगा.