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शुक्रवार, 13 अगस्त, 2004 को 06:57 GMT तक के समाचार

कट्टरपंथी शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र

इराक़ में सद्दाम हुसैन शासन के पतन के बाद से ही कट्टरपंथी शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र लगातार ख़बरों में रहे हैं.

एक समय जहाँ उन्होंने 'आक्रमणकारियों' और इराक़ी पुलिस के ख़िलाफ़ अपने हथियार समर्थकों को मोर्चा लेने के लिए कहा, वहीं एक बार वह नए इराक़ में अपने लिए कोई राजनीतिक भूमिका की तलाश करते दिखे.

मुक़्तदा की उम्र 30 वर्ष के क़रीब बताई जाती है. एक ऐसे समाज में जहाँ कि धार्मिक प्रभाव के लिए उम्र और अनुभव मायने रखता है, मुक़्तदा बाकियों से अलग हैं.

उन्होंने इराक़ी राष्ट्रवाद और कट्टरपंथी शियावाद को मिलाते हुए शियाओं के निर्धन वर्ग में अपनी जगह बनाई.

मुक़्तदा के आलोचक उन्हें एक अनुभवहीन कट्टरपंथी शिया मानते हैं जिसमें की धैर्य की कमी है, और जो बलपूर्वक शिया संस्थाओं पर क़ब्ज़ा जमाना चाहते हैं.

सादिक़ सद्र

उनके पिता वरिष्ठ शिया नेता मोहम्मद सादिक़ सद्र की 1999 में हत्या कर दी गई थी. हत्या के पीछे तत्कालीन इराक़ी सरकार के एजेंटों का हाथ बताया गया था.

सादिक़ सद्र ने जो सहायता संस्थाएँ स्थापित की थीं, उन्हीं संस्थाओं के नेटवर्क को मुक़्तदा की ताक़त के रूप में देखा जाता है.

अमरीकी सेना के हमले के बाद के दिनों में मुक़्तदा के समर्थकों ने बग़दाद के निर्धन शिया इलाक़े में खाद्य सामग्री बाँटी थी.

उनके नाम पर बग़दाद के शिया बहुल इलाक़े का नाम सद्दाम सिटी से बदल कर सद्र सिटी कर दिया गया.

मुक़्तदा ने जून 2003 में अपने हथियारबंद दस्ते मेहदी सेना का गठन किया. यह पवित्र शहर नजफ़ में शिया केंद्रों की रक्षा के नाम पर किया गया.

टकराव

इसी के साथ उन्होंने साप्ताहिक अख़बार अल-हावज़ा का भी प्रकाशन शुरू किया.

अमरीकी प्रशासन ने मार्च 2004 में मुक़्तदा के अख़बार के प्रकाशन पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि यह अमरीकियों के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा दे रहा है. इराक़ी अंतरिम सरकार ने जुलाई में यह रोक हटा ली.

उदारवादी शिया नेता अयातुल्ला अली सिस्तानी की मान्यता के विपरित मुक़्तदा का मानना है कि शिया आध्यात्मिक नेताओं को इराक़ के राजनीतिक भविष्य के निर्धारण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.

इस साल जून में ऐसे संकेत मिले थे कि वह थोड़ा नरम पड़े हैं और शायद राजनीतिक प्रक्रिया से जुड़ें, लेकिन अगले ही महीने उन्होंने अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी को अमरीकियों का मोहरा बताया.

इराक़ के एक जज ने उदारवादी शिया नेता अब्दुल मजीद अलखोई की अप्रैल 2003 में हुई हत्या के मामले में मुक़्तदा के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी कर रखा है.

मुक़्तदा ने हत्या कांड में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से साफ इनकार किया है.