शुक्रवार, 13 अगस्त, 2004 को 11:56 GMT तक के समाचार
दक्षिणी इराक़ के नजफ़ शहर में एक हफ़्ते की भीषण लड़ाई के बाद फ़िलहाल शांति स्थापित हुई है.
वहाँ एक हफ़्ते तक अमरीका और इराक़ सरकार के बलों और शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों के बीच गोलीबारी चलती रही.
लेकिन अब दोनो पक्षों के बीच अस्थायी संघर्षविराम हो गया है दोनो पक्षों का कहना है कि लड़ाई पूरी तरह बंद करने के लिए बातचीत चल रही है.
शिया नेता के एक प्रतिनिधि ने कहा है कि पूरी तरह से शांति स्थापित करने में सबसे बड़ी अड़चन है सरकार की माँग कि विद्रोही पूरी तरह निशस्त्र हों.
इराक़ी सरकार का कहना है कि शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र बातचीत में भाग ले रहे हैं और वे घायल नहीं हुए हैं.
लेकिन इससे पहले शिया नेता के समर्थकों के हवाले से आई ख़बरों में कहा गया था कि शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र अमरीकी और इराक़ी सेना के हमले में घायल हो गए हैं.
सैनिकों ने नजफ़ में हज़रत अली की मज़ार को घेर लिया जहाँ शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों ने मोर्चा बनाया हुआ था और भीषण गोलीबारी कर रहे थे.
मुक़्तदा अल सद्र के एक प्रवक्ता अहमद अल शिनाबी ने बताया कि अमरीकी सेना की बमबारी में सद्र के शरीर में तीन जगह - छाती, हाथ और पाँव में चोट लगी.
एक अन्य प्रवक्ता ने कहा था कि मुक़्तदा सद्र की हालत स्थिर है.
लेकिन इराक़ी गृह मंत्री फ़लाह अल नक़ीब ने रॉएटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि मुक़्तदा अल सद्र घायल नहीं हुए हैं और सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं.
टैंकों से हमला
इससे पहले टैंको और लड़ाकू विमानों की मदद से लगभग चार हज़ार सैनिकों ने शिया नेता के समर्थकों पर हमला किया.
विद्रोहियों ने इसका जवाब रॉकेट से चलाए जाने वाले ग्रेनेड और बमबारी से किया.
अमरीकी सैनिकों ने मुक़्तदा अल सद्र के घर को भी निशाना बनाया और वहाँ भारी गोलीबारी की.
बुधवार से ही अमरीकी सैनिक स्थानीय नागरिकों से अपील कर रहे थे कि वे नजफ़ से बाहर निकल जाएँ. बड़ी संख्या में लोग नजफ़ से बाहर गए भी थे.
पवित्र मज़ार
बग़दाद से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी सेना हज़रत अली के मज़ार को नुक़सान पहुँचाने का जोखिम नहीं ले सकती थी क्योंकि वह शिया मुसलमानों के पवित्रतम तीर्थों में से एक है.
अमरीकी सेना ने घोषणा कर दी थी कि कोई भी अमरीकी सैनिक हज़रत अली की मज़ार के भीतर नहीं जाएगा.
इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री इयाद अलावी ने भी कहा था कि हज़रत अली की मज़ार पर हमला नहीं होगा.
अगर मज़ार को क्षति पहुँची तो इराक़ के शिया मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है.
इराक़ के सबसे प्रभावशाली शिया नेता आयतुल्लाह अली अल सिस्तानी ने दोनों पक्षों से अनुरोध किया कि वे संयम बरतें ताकि मज़ार को नुक़सान न पहुँचे.
सिस्तानी ने कहा, "बहुत दुख की बात है. दोनों पक्षों को नजफ़ की पवित्र भूमि और पवित्र मज़ार का सम्मान करना चाहिए."
अमरीकी सेना ने दावा किया था कि उसने मेहदी सेना के 300 छापामारों को मार दिया है लेकिन मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों का कहना था कि मारे गए उनके साथियों की संख्या इससे बहुत कम है.