शुक्रवार, 13 अगस्त, 2004 को 08:20 GMT तक के समाचार
इराक़ से मिली ख़बरों में कहा गया है कि शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र अमरीकी और इराक़ी सेना के हमले में घायल हो गए हैं.
मुक़्तदा अल सद्र के एक प्रवक्ता अहमद अल शिनाबी ने बताया है कि अमरीकी सेना की बमबारी में सद्र के शरीर में तीन जगह - छाती, हाथ और पाँव में चोट लगी है.
एक अन्य प्रवक्ता ने कहा है कि मुक़्तदा सद्र की हालत स्थिर है.
प्रवक्ता ने ये भी कहा कि मुक़्तदा अल सद्र ने अपने समर्थकों से अपील की है कि चाहे उनकी मौत भी हो जाए लेकिन वे लड़ाई जारी रखें.
लेकिन इराक़ी गृह मंत्री फ़लाह अल नक़ीब ने रॉएटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि मुक़्तदा अल सद्र घायल नहीं हुए हैं और सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं.
अमरीका और इराक़ के सैनिकों ने हज़रत अली की मज़ार को घेर रखा है जहाँ शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों ने मोर्चा बनाया हुआ है.
टैंको और लड़ाकू विमानों की मदद से लगभग चार हज़ार सैनिकों ने शिया नेता के समर्थकों पर हमला किया है.
विद्रोहियों ने इसका जवाब रॉकेट से चलाए जाने वाले ग्रेनेड और बमबारी से किया है. नजफ़ में मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों ने पिछले आठ दिन से विद्रोह किया हुआ है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लगता है कि दोनो पक्षों के बीच घायल लोगों को मदद पहुँचाने के लिए किसी तरह का अस्थायी संघर्षविराम हुआ है.
भीषण लड़ाई
गुरूवार को बड़ी संख्या में हेलिकॉप्टरों और टैंकों के साथ दो हज़ार अमरीकी सैनिकों ने लगभग 1800 इराक़ी सैनिकों के साथ मिलकर एक हज़ार छापामारों से लड़ाई शुरू की.
अमरीकी सैनिकों ने मुक़्तदा अल सद्र के घर को भी निशाना बनाया और वहाँ भारी गोलीबारी की.
लेकिन यह नहीं पता है कि हमले के समय मुक़्तदा अल सद्र वहाँ थे या नहीं.
बुधवार से ही अमरीकी सैनिक स्थानीय नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि वे नजफ़ से बाहर निकल जाएँ और बड़ी संख्या में लोग नजफ़ से बाहर गए भी हैं.
मुक़्तदा अल सद्र के एक प्रमुख सहयोगी और मेहदी सेना के एक प्रमुख कमांडर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा है कि वे लड़ाई जारी रखेंगे.
उन्होंने कहा, "हम अपने किसी भी ठिकाने पर हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं."
पवित्र मज़ार
बग़दाद से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी सेना हज़रत अली के मज़ार को नुक़सान पहुँचाने का जोखिम नहीं ले सकती क्योंकि वह शिया मुसलमानों के पवित्रतम तीर्थों में से एक है.
अमरीकी सेना का कहना है कि कोई भी अमरीकी सैनिक हज़रत अली की मज़ार के भीतर नहीं जाएगा.
इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री इयाद अलावी ने भी कहा है कि हज़रत अली की मज़ार पर हमला नहीं होगा.
इराक़ी अधिकारियों ने भी कहा है कि मज़ार में मोर्चा बनाए विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अगर कोई बड़ी कार्रवाई होगी तो उसमें केवल इराक़ी सैनिक होंगे अमरीकी नहीं.
अगर मज़ार को क्षति पहुँची तो इराक़ के शिया मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है.
इराक़ के सबसे प्रभावशाली शिया नेता आयतुल्लाह अली अल सिस्तानी ने दोनों पक्षों से अनुरोध किया है कि वे संयम बरतें ताकि मज़ार को नुक़सान न पहुँचे.
सिस्तानी ने कहा है, "यह बहुत दुख की बात है. दोनों पक्षों को नजफ़ की पवित्र भूमि और पवित्र मज़ार का सम्मान करना चाहिए."
अमरीकी सेना ने कहा है कि उन्होंने मेहदी सेना के 300 छापामारों को मार दिया गया है लेकिन मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों का कहना है कि मारे गए उनके साथियों की संख्या इससे बहुत कम है.