रविवार, 08 अगस्त, 2004 को 06:02 GMT तक के समाचार
इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने नजफ़ में विद्रोहियों से अनुरोध किया है कि वे हथियार डाल दें और नजफ़ के पवित्र शहर को छोड़कर चले जाएँ.
नजफ़ में शहर में अचानक पहुँचे अलावी ने कहा कि वे नहीं मानते कि विद्रोह शिया चरमपंथियों ने किया है. उनका मानना था कि विद्रोही आम आपराधिक तत्व हैं.
उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने इराक़ी शहर नजफ़ में जारी संकट ख़त्म करने के लिए सहायता की पेशकश की है.
अन्नान ने नजफ़ में जारी हिंसा पर चिंता जताई और कहा कि वहाँ संघर्ष विराम के लिए हरसंभव कोशिश की जानी चाहिए.
नजफ़ में अमरीकी सैनिकों और शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों के बीच पिछले तीन दिनों से भारी लड़ाई चल रही है.
अमरीकी सैनिकों का दावा है कि उन्होंने नजफ़ में 300 विद्रोहियों को मार डाला है लेकिन शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र का कहना है कि सिर्फ़ 36 लोग ही मारे गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने जारी किए गए एक बयान में कहा कि उन्हें नजफ़ में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने पर चिंता है और 'ऐसी स्थिति में बल प्रयोग आख़िरी उपाय होना चाहिए.'
अन्नान के एक प्रवक्ता ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र नजफ़ में संकट ख़त्म करने के लिए मध्यस्थता करने को राज़ी है."
इस समय इराक़ में संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों की उपस्थिति कम है लेकिन इराक़ के लिए नियुक्त संयुक्त राष्ट्र के दूत अशरफ़ जहाँगीर क़ाज़ी इस महीने बग़दाद जाने वाले हैं और उम्मीद है कि इसके बाद वहाँ संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों की संख्या बढ़ सकती है.
आम माफ़ी
इस बीच अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री इयाद अलावी ने हिंसा रोकने और साफ़-सुथरे समाज की स्थापना के प्रयासों के तहत एक महीने की आम माफ़ी देने का ऐलान किया है.
नजफ़ के गवर्नर ने शिया लड़ाकुओं को शहर छोड़ने का आदेश भी दिया है.
अलावी ने कहा है कि आम माफ़ी के दायरे में छोटे-मोटे अपराध, हल्के हथियार विस्फोटक सामग्री रखने और विद्रोही गतिविधियों में लगे लोगों की मदद करना या उन्हें धन देने जैसे अपराध शामिल हैं.
उन्होंने कहा है कि हत्या, बलात्कार, लूटपाट और सरकारी इमारतों पर हमला करने वाले आम माफ़ी के दायरे से बाहर रहेंगे.
अलावी ने कहा है कि देश का क़ानून ऐसे लोगों को समाज की मुख्य धारा में शामिल होने का मौक़ा देगा जो उनके शब्दों में, "फ़िज़ूल कामों की वजह से अपनी ज़िंदगी बर्बाद करना चाहते हैं."
मगर इस बीच इराक़ के उपराष्ट्रपति इब्राहिम अल-जाफ़री का कहना है कि ऐसा आदेश इराक़ी सरकार की ओर से आना चाहिए था क्योंकि अल-सद्र के साथ संघर्ष सिर्फ़ नजफ़ तक ही सीमित नहीं रहकर नासिरिया, बसरा और बग़दाद के सद्र सिटी इलाक़े तक फैल गया है.
अमरीकी सेना का दावा है कि उसने इस संघर्ष में 300 इराक़ी लड़ाकुओं को मार दिया है.
वहीं उपराष्ट्रपति ने इस दावे के बाद कहा कि इतने लोगों को मार देना किसी देश के सभ्य निर्माण का तरीक़ा नहीं हो सकता.
वैसे अमरीकी सेना के इस दावे के विपरीत अल-सद्र के प्रवक्ता का कहना था कि कुल 36 लोग मारे गए हैं.