मिस्र ने कहा है कि इराक़ में सैनिक भेजने के बारे में कोई विचार नहीं किया जा रहा है.
इराक़ में मिस्र के एक राजनयिक को बंधक बना लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए मिस्र के विदेश मंत्री अहमद अब्दुल ग़इत ने अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट की.
उन्होंने कहा कि जिस राजनयिक को बंधक बनाया गया है वह मिस्र और इराक़ के लोगों के बीच भाईचारा और आपसी संबंधों में मज़बूती लाने के लिए प्रयास कर रहे थे.
इससे पहले मोहम्मद मम्दूह कुतुब नाम के राजनयिक को अगवा करने वाले अपहर्ताओं ने कहा था कि उन्होंने ये क़दम मिस्र सरकार के इराक़ को सैनिक सहायता देने के फ़ैसले के विरोध में उठाया है.
इराक़ के प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने हाल ही में मिस्र की राजधानी काहिरा का दौरा कर उनसे अपने देश में सैनिक भेजने का आग्रह किया था.
संवाददाताओं का कहना है कि मिस्र ने सैनिक भेजने से तो इनकार कर दिया था मगर ये कहा था कि वह इराक़ी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण दे सकता है.
राजनयिक बंधक
इराक़ में मिस्र के एक राजनयिक को शुक्रवार को बंधक बना लिया गया जबकि एक बंधक को पाँच अन्य विदेशियों के साथ पहले बंधक बनाया गया था.
इनमें तीन भारतीय और दो कीनियाई नागरिक थे.
मिस्र के बग़दाद स्थित दूतावास ने शुक्रवार को अपने एक नागरिक को बंधक बनाए जाने की पुष्टि की.
अरबी टीवी चैनल अल जज़ीरा ने अपहर्ताओं की तरफ़ से भेजे गए एक वीडियोटेप का प्रसारण किया जिसमें इस राजनयिक को छह नक़ाबपोश बंदूकधारियों के बीच बैठा हुआ दिखाया गया है.
अपहर्ता अपने आप को लायंस ऑफ़ अल्लाह ब्रिगेड नामक गुट का सदस्य बता रहे हैं. बंधक बनाए गए राजनयिक का नाम मोहम्मद मम्दूह कुतुब बताया गया है.
इस वर्ष के आरंभ से इराक़ में विदेशियों को बंधक बनाने का सिलसिला शुरू हुआ मगर किसी राजनयिक का अपहरण पहली बार हुआ है.
भारतीय बंधक
उधर इराक़ में तीन भारतीयों समेत सात विदेशी नागरिकों को बंधक बनाने वाले अपने अपहर्ताओं ने अपनी माँगें पूरी होने की 48 घंटे की नई समयसीमा दी है.
पहले इन अपहर्ताओं ने अपनी माँगें मनवाने के लिए 72 घंटे की मियाद रखी थी जो शनिवार को समाप्त हो रही थी.
जिन सात लोगों को बंधक बनाया गया उनमें तीन भारतीय, तीन कीनियाई और एक नागरिक मिस्र का है.
अपहर्ताओं ने इन तीनों देशों से इराक़ से अपनी फ़ौज और कर्मचारी हटाने की माँग की है जबकि इन तीनों ही देशों ने इराक़ में सेना नहीं भेजी है.
बंधक बनाए गए तीनों लोग कुवैत की एक कंपनी के लिए काम करते हैं जो इराक़ में अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ सहयोग कर रही है.
अपहर्ताओं ने उस कुवैती कंपनी 'कुवैत एंड गल्फ़ लिंक ट्रांसपोर्ट' (केजीएल) से अपने सभी कर्मचारियों को इराक़ से वापस हटाने की भी माँग की है.
अल जज़ीरा के अनुसार अपहर्ताओं ने कंपनी से उन इराक़ियों के परिवारों को मुआवज़ा भी देने को कहा है जो इस साल फ़लूजा में अमरीकी सैनिकों के साथ लड़ाई में मारे गए थे.