बुधवार, 21 जुलाई, 2004 को 17:31 GMT तक के समाचार
इराक़ में एक संगठन ने कुछ विदेशियों को बंधक बना लिया है और माँग की है कि अगर उनके सैनिक और कर्मचारी वहाँ से नहीं हटाए गए तो उनकी हत्या कर दी जाएगी.
बंधक बनाए गए लोगों में तीन भारतीय, दो कीनिया के और एक मिस्र का नागरिक है.
ये सभी लोग कुवैत की एक कंपनी के लिए काम करते हैं जो इराक़ में अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ सहयोग कर रही है.
संगठन ने उस कुवैती कंपनी से अपने सभी कर्मचारी इराक़ से वापस हटाने को कहा है. इस कंपनी का नाम अभी पता नहीं चला है.
समाचार एजेंसी एपी ने ख़बर दी है कि जिन तीन भारतीयों को बंधक बनाया गया है उनके नाम हैं - अंतर्यामी, तिलकराज और सुखदेव सिंह.
इस बीच भारत के विदेश राज्य मंत्री ई अहमद ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा है कि भारत उन तीनों बंधकों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है.
उन्होंने कहा है कि भारत बग़दाद स्थित दूतावास से बात कर रहा है कि बंधकों को जल्दी से जल्दी कैसे रिहा कराया जाए और उनकी सुरक्षित वापसी हो.
इन तीनों देशों यानी भारत, कीनिया और मिस्र ने इराक़ में अपने सैनिक नहीं भेजे हैं लेकिन अंतरिम प्रधानमंत्री इयाद अलावी ने हाल ही में भारत और मिस्र से गठबंधन में शामिल होने और इराक़ में अपनी सेना भेजने की गुज़ारिश की थी.
भारत ने फिलहाल इराक़ में अपने सैनिक नहीं भेजने का फ़ैसला किया है.
दुबई के एक टेलीविज़न चैनल अल अरबिया ने एक वीडियो टेप दिखाया है जिसमें द होल्डर्स ऑफ़ द ब्लैक बैनर्स नाम के संगठन ने छह ट्रक चालकों को बंधक बनाने का दावा किया है.
संगठन ने कहा है, "जो भी अमरीकियों के साथ काम करेंगे उन्हें मुजाहिदीनों के क़हर का सामना करना पड़ेगा."
संगठन की तरफ़ से कंपनी को चेतावनी दी गई है कि बुधवार रात आठ बजे (स्थानीय समय) से उनकी उल्टी गिनती शुरू हो जाती है और अगर कंपनी इराक़ से नहीं हटी तो हर 72 घंटे में एक बंधक की हत्या कर दी जाएगी.
तीन देशों के इन छह लोगों को बंधक बनाए जाने की इस घटना से एक दिन पहले ही फ़िलीपीन्स के उस ट्रक चालक को रिहा किया गया जिसे एक संगठन ने कुछ दिन पहले बंधक बना लिया था.
फ़िलीपीन्स ने इस चेतावनी के बाद अपने 51 सैनिक इराक़ से हटा लिए थे.