शनिवार, 17 जुलाई, 2004 को 19:58 GMT तक के समाचार
फ़लस्तीनी प्रशासन इस समय बड़े राजनीतिक संकट में है.
एक ओर तो गज़ा पट्टी में अपहरण हो रहे हैं और क़ानून व्यवस्था की स्थिति ख़राब है. वहाँ आपातकाल भी घोषित किया जा चुका है.
दूसरी ओर प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने इस्तीफ़ा देने की पेशकश की है, हालांकि इसे राष्ट्रपति यासर अराफ़ात ने ठुकरा दिया है.
राष्ट्रपति अराफ़ात ने सुरक्षा सेवा में फेरबदल की घोषणा की है.
सुरक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों के तहत अब आठ शाखाओं की जगह सिर्फ़ तीन शाखाएँ ही होंगी. उनकी जगह नए सुरक्षा प्रमुख की नियुक्ति हुई है.
अराफ़ात ने अपने भतीजे मूसा को सभी सुरक्षा बलों का प्रभारी नियुक्त किया है.
संकट
अहमद क़ुरई ने इस्तीफ़े की पेशकश ऐसे समय पर की है जब फ़लस्तीनी सुरक्षा सेवाओं के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही है.
यह फ़लस्तीनी राजनीतिक संकट तत्काल तो ख़त्म होता हुआ दिखाई नहीं देता.
यासर अराफ़ात चाहते हैं कि अहमद क़ुरई और उनका मंत्रिमंडल काम करता रहे.
प्रधानमंत्री क़ुरैई ने गज़ा में भारी अव्यवस्था की शिकायत की है. वे चाहते हैं कि इस स्थिति से निपटने के लिए उन्हें और अधिक अधिकार दिए जाएँ.
शुक्रवार को वहाँ चार फ़्रांसिसी नागरिकों का अपहरण कर लिया गया था और ख़ुद पुलिस प्रमुख का भी अपहरण हो गया था.
अपहरकर्ताओं ने पुलिस प्रमुख पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. फ़लस्तीनी नेता अराफ़ात ने पुलिस प्रमुख को बर्खास्त कर दिया है.
फ़लिस्तीनी सुरक्षासेवा के दो वरिष्ठ अधिकारियों - अमीन अल-हिंदी और राशिद अबू शबाक ने अपहरण की घटनाओं के बाद इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी, जिसे अराफ़ात ने ठुकरा दिया है.
सभी पक्षों ने इस संकट को हल करने के प्रयास करने की बात कही है लेकिन मुश्किल यह है कि कोई नहीं जानता कि रास्ता क्या है.
इस घटनाक्रम से यासर अराफ़ात पर यह दबाव बढ़ गया है कि अब वे सुधार कार्यक्रमों को लागू करें.
यह दबाव अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की ओर से भी है और फ़लस्तीनी प्रशासन के आलोचकों की ओर से भी.
आपातकाल
इससे पहले गज़ा में अपहरण की कई घटनाओं के बाद फ़लस्तीनी राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने वहाँ आपातकाल की घोषणा कर दी थी.
सरकारी इमारतों के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं.
सुरक्षाकर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है और उन्हें सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं.
उधर फ़लस्तीनी बंदूकधारियों ने उन चार फ़ांसीसी राहतकर्मियों को रिहा कर दिया है जिन्हें शुक्रवार को बंधक बनाया गया था.
लेकिन एक फ़लस्तीनी अधिकारी अब भी बंधक हैं.