मंगलवार, 13 जुलाई, 2004 को 16:24 GMT तक के समाचार
मलेशिया की सरकार का कहना है कि उसकी योजना देश से लगभग दस लाख अवैध आप्रवासी कर्मचारियों को बाहर निकालने की है.
इस बीच ऑस्ट्रेलिया ने हज़ारों शरणार्थियों को देश में स्थाई तौर पर रहने के लिए मौक़ा देने का फ़ैसला किया है.
देश के गृहमंत्री का कहना है कि इसके लिए मलेशिया के लगभग चार लाख लोगों के विशेष दल बनाए जाएँगे और उन्हें इन लोगों को निकालने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.
वैसे इसकी कोई वजह तो नहीं बताई गई है मगर मलेशिया में बढ़ रहे अपराध के स्तर को लेकर देस में चिंता है.
सरकार के आँकड़ों पर नज़र डालें तो मलेशिया में काम करने दूसरे देशों से आए लोगों की संख्या क़रीब 25 लाख है जिनमें से आधे अवैध रूप से देश में रह रहे हैं.
काम करने वाले ये लोग मलेशिया की आबादी का 10 प्रतिशत हिस्सा हैं.
देश के गृहमंत्री आज़मी ख़ालिद ने चेतावनी दी है कि जब इन लोगों को गिरफ़्तार किया जाए तो इनको काम देने वाली कंपनियाँ हंगामा न करें.
दो वर्ष पहले सरकार ने कुछ ऐसा ही अभियान छेड़ा था जिसके बाद इंडोनेशिया, फिलीपीन्स और भारतीय उपमहाद्वीप से आए लोगों की हवाई अड्डे और बंदरगाहों पर भीड़ जमा हो गई थी.
तब कुआलालंपुर और देश के अन्य हिस्सों में इसका काफ़ी असर देखा गया था.
उस समय सरकार का कहना था कि इन अवैध आप्रवासियों की वजह से देश में अपराध बढ़ा था.
हालांकि मंत्री ने इस नए अभियान के पीछे कारण को स्पष्ट नहीं किया.
मगर कुआलालंपुर से बीबीसी संवाददाता जोनाथन जेंट का कहना है कि चोरी और हिंसा की वारदातों की वजह से हो सकता है कि सरकार को फिर ऐसा फ़ैसला लेना पडा हो.
ऑस्ट्रेलियाई नीति में बदलाव
उधर दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया की शरणार्थियों को लेकर सख़्त नीति में भी बदलाव नज़र आ रहा है.
पहले जिन शरणार्थियों को अस्थाई रूप से देश में रहने का वीज़ा मिला था उन्होंने अनिश्चितता और तनाव की शिकायत की थी.
इस तरह का वीज़ा 'टेम्पोरेरी प्रोटेक्शन वीज़ा' भी कहा जाता है.
ये लगभग पाँच साल पहले इंडोनेशिया से नाव पर सवार होकर आने वाले शरणार्थियों से निपटने के लिए शुरू किया गया था. आप्रवासी मामलों की मंत्री अमांडा वानस्टोन ने कहा कि ये नीति काफ़ी सफल रही थी.
अब सरकार ने फ़ैसला सुनाया है कि देश में शरण लेने आए आप्रवासियों को स्थाई रूप से देश में रहने के लिए अनुमति दी जा सकती है.
शरणार्थियों के लिए काम करने वाले कुछ कार्यकर्ताओं ने एक तरफ़ इसका स्वागत किया है मगर वहीं कुछ इसे इस वर्ष देश में होने वाले आम चुनाव को देखते हुए लिया गया फ़ैसला बता रहे हैं.