रविवार, 04 जुलाई, 2004 को 08:27 GMT तक के समाचार
इराक़ में पिछले महीने बंधक बनाए गए एक अमरीकी सैनिक के संबंध में विरोधाभासी ख़बरें आ रही हैं.
लेबनान में जन्मे कॉरपोरल वासेफ़ अली हुसैन के बारे में शनिवार को एक इस्लामी वेबसाइट पर एक चरमपंथी गुट अंसार अल सुन्ना की तरफ़ से जारी एक बयान में ये कहा गया था कि हुसैन की गला काटकर हत्या कर दी गई है.
बयान में ये भी कहा गया कि इस हत्या की वीडियो रिकॉर्डिंग जारी की जाएगी.
लेबनान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को इस बारे में कहा कि उन्हें लगता है कि हुसैन की ह्त्या कर दी गई है.
मगर अंसार अल सुन्ना ने फिर एक नया बयान जारी किया कि हुसैन को मारा नहीं गया है और शनिवार को जो बयान जारी किया गया वह उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नहीं किया गया था.
अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अधिकारी अभी इसकी जाँच कर रहे हैं.
धमकी
इराक़ी चरमपंथी गुट अंसार-अल-सुन्ना आर्मी ने पिछले दिनों धमकी दी थी कि अगर सभी इराक़ी क़ैदियों को रिहा नहीं किया जाएगा तो वे अमरीकी सैनिक की हत्या कर देंगे.
पिछले रविवार को अरबी टीवी चैनल अल जज़ीरा ने वासेफ़ अली हुसैन का वीडियो दिखाया था जिसमें उसे बंधक की तरह दिखाया गया था और उसकी आँखों पर पट्टी लगी हुई थी.
वासेफ़ अली चार साल पहले लेबनान से अमरीका गए थे.
उन्होंने बाद में अमरीका की नागरिकता ले ली थी.
तीसरी बार
वासेफ़ के पिता लेबनान के उत्तरी बंदरगाह शहर त्रिपोली में रहते हैं. उन्होंने बंधकों से वासेफ़ को छोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि वह भी एक मुसलमान और एक अरब मूल के हैं.
इस तरह ऐसा तीसरी बार है जबकि इराक़ में किसी बंधक की हत्या हुई है.
पिछले महीने एक दक्षिण कोरियाई अनुवादक किम सुन इल की भी इराक़ी चरमपंथियों ने हत्या कर दी थी.
दक्षिण कोरिया ने इन चरमपंथियों की उस माँग को ठुकरा दिया था जिसमें उन्होंने दक्षिण कोरिया से अपने सैनिक वापस बुलाने को कहा था.
जबकि मई में एक अमरीकी नागरिक निक बर्ग की चरमपंथियों ने गला काटकर हत्या कर दी थी.