रविवार, 04 जुलाई, 2004 को 23:27 GMT तक के समाचार
जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला ने कहा है कि वह इन ख़बरों से बहुत चिंतित हैं कि सैकड़ों लोग रोज़ाना पड़ोसी देशों से इराक़ में घुस रहे हैं.
बीबीसी से बातचीत में शाह अब्दुल्ला ने कहा कि यह बेहद ज़रूरी है कि इराक़ की नई सरकार ख़ुद को जल्दी मज़बूत करे क्योंकि इराक़ में अशांति जारी रहने से गृहयुद्ध की आशंका को बल मिलता है.
उन्होंने कहा है कि इराक़ में इस तरह का संघर्ष पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता का कारण बन सकता है.
"अगर पड़ोसी देशों से लोगों के इराक़ में दाख़िल होने की ये ख़बरें सही हैं तो प्रधानमंत्री ईयाद अलावी को इस समस्या से कल नहीं, आज निपटना होगा."
उन्होंने कहा कि इराक़ की नई सरकार की मदद करने से ही पड़ोसी देशों को राहत मिल सकती है.
शाह अब्दुल्ला ने कहा कि पड़ोसी देश अगर इराक़ी सरकार के साथ एकजुटता नहीं दिखाते को साल 2004 में हालात बहुत ख़राब हो सकते हैं.
इससे पहले इराक़ के अंतरिम विदेश मंत्री होशिया जेबारी ने कहा था कि इराक़ी अधिकारियों ने पड़ोसी देशों से अपनी सीमाओं पर कड़ा नियंत्रण बरतने को बार-बार कहा है लेकिन इस बारे में कुछ ठोस नहीं किया गया है.
ज़ेबारी ने कहा कि लगभग सभी पड़ोसी देशों के साथ यह समस्या है लेकिन सीरिया और ईरान के साथ ख़ासतौर पर यह मुद्दा उठाया गया है.
सद्र का विरोध
विद्रोही शिया मौलवी मुक़्तदा अल सद्र ने कहा है कि वह विदेशी ताक़तों के हाथों इराक़ के क़ब्ज़े का विरोध करते रहेंगे.
उन्होंने यह भी कहा है कि इराक़ की नई सरकार की कोई वैधता नहीं है.
सद्र ने कहा कि इराक़ में जो भी अमरीकी सेनाओं के साथ सहयोग करेगा उसके साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने चरमपंथियों से अपील की थी कि वे हथियार डाल दें. यह अपील विद्रोही शिया मौलवी मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों से भी की गई थी.
अमरीकी टेलीविज़न चैनल एबीसी से इंटरव्यू में अलावी ने कहा था कि उनकी सरकार का रुख़ बिल्कुल साफ़ है कि इराक़ में किसी भी चरमपंथी को सक्रिय रहने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.
अलावी ने कहा कि मुक़्तदा अल सद्र की तरफ़ से इशारा मिला है कि उनके समर्थक हथियार डाल देंगे, बशर्ते उन्हें आम माफ़ी मिले.
"लेकिन सिर्फ़ कहने भर से कुछ नहीं होगा, कार्रवाई की ज़रूरत है इसलिए गेंद अब सद्र के पाले में है."
अलावी ने कहा कि जो भी व्यक्ति क़ानून के शासन और मानवाधिकारों का सम्मान करे तो उसका इराक़ी व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए स्वागत है.