गुरुवार, 01 जुलाई, 2004 को 20:54 GMT तक के समाचार
इराक़ की राजधानी बग़दाद में इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ अदालती कार्रवाई शुरु होने पर मिलीजुली प्रतिक्रिया हुई है.
कुछ इराक़ियों ने इसे अमरीकी दुष्प्रचार बताया है.
लेकिन अन्य लोगों का मानना है कि सद्दाम के ख़िलाफ़ मुकदमा तो चलना चाहिए लेकिन इराक़ और भी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है.
अन्य अरब देशों में भी लोगों की प्रतिक्रिया मिलीजुली थी.
इराक़ के पड़ेसी देश कुवैत ने सद्दाम को युद्ध अपराधी बताया और माँग की है कि उन्हें मृत्युदंड दिया जाना चाहिए.
वहीं मिस्र के एक वक़ील ने सद्दाम को युद्धबंदी बताया. उनका कहना था कि इराक़ पर कब्ज़ा करने वाले देश की मदद से स्थापित सरकार का चलाया गया मुकदमा ग़ैर-क़ानूनी है.
मिस्र में बीबीसी संवाददाता का कहना था कि ये मुकदमा लोगों की नज़रों में तभी जायज़ सिद्ध होगा जब इराक़ी प्रशासन ये दिखा पाएगा कि वह अमरीका के दबाव से मुक्त है.
उधर अमरीका का दावा है कि सद्दाम हुसैन के साथ न्याय हो रहा है चाहे उन्होंने ख़ुद अनेक इराक़ियों को न्याय से वंचित रखा.
अरब मीडिया ने वैसे आमतौर पर सद्दाम और उनके सहयोगियों पर मुक़दमा चलाने और कड़ी क़ानूनी प्रक्रिया का पालन किए जाने की हिमायत की है.
टेलीविज़न चैनेलों की राय
अरबी भाषा के सैटेलाइट चैनेलों, अल अरबिया और अल जज़ीरा ने अपना अधिकांश समय सद्दाम हुसैन की अदालत में पेशी के कवरेज को दिया.
अल जज़ीरा ने लोगों के मूड का जायज़ा लेने के लिए बग़दाद और नजफ़ की सड़कों पर उनसे बात की.
ज़्यादातर लोग सद्दाम का समर्थन करते देखे गए.
कुछ लोगों की मांग थी कि बुश पर भी मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.
हालाँकि नजफ़ में प्रतिक्रिया मिलीजुली थी.
'न्याय होना चाहिए'
एक आदमी का कहना था, "सद्दाम ने 35 साल तक शासन किया है जिसमें उसने अनगिनत लोगों को मारा, बेघर किया और उन पर ज़ुल्म किए. अब मुक़दमे में उनका फ़ैसला होना चाहिए".
मध्यपूर्व के अख़बारों में भी अलग-अलग राय थी.
सऊदी अरब में अल रियाध ने यह सवाल उठाया कि मुक़दमे के दौरान सद्दाम को हीरो बना कर पेश किया जाएगा या अपराधी.
अख़बार का कहना था जो भी हो वह इस दौर के 'सितारे' तो बन ही गए.
तो अल हयात ने इराक़ के नए नेताओं को सावधान किया कि अपने 'दुश्मन' से चौकन्ने रहें.