सोमवार, 28 जून, 2004 को 15:20 GMT तक के समाचार
इराक़ में सत्ता हस्तांतरण के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि यह लोकतंत्र की स्थापना की ओर अगला क़दम है.
तुर्की के ऐतिहासिक शहर इस्तांबूल में नैटो की बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि इराक़ में आ रहे बदलाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए एक उदाहरण है और इन प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन हासिल है.
बुश ने कहा, "इराक़ में हो रहे इन प्रयासों को रोकने के लिए विदेशी आतंकवादी हमला कर रहे हैं, लेकिन सभ्य समाज के लोग इन हमलों को सफल नहीं होने देंगे."
बुश ने कहा कि इराक़ी सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अपने नागरिकों और संसाधनों की रक्षा कर सकें.
बुश ने कहा, "इराक़ में हम शांति, स्वतंत्रता और लोकतंत्र की आशा के लिए काम कर रहे हैं, हम अपने इस काम में सफल हो रहे हैं हालांकि चुनौतियाँ भी हैं जिनसे हम वाकिफ़ हैं."
नैटो
ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि "आज का दिन इराक़ की जनता के सफ़र में मील का पत्थर है."
उन्होंने इराक़ में जारी हिंसा के बारे में कहा कि कुछ लोग मुक्त, सबल और बहुलतावादी इराक़ की स्थापना नहीं चाहते और हिंसा फैलाकर बाधाएँ खड़ी कर रहे हैं.
ब्लेयर ने कहा, "आतंकवादियों का मक़सद इराक़ को आशा का प्रतीक बनने से रोकना है, इराक़ को हम मध्य पूर्व में एक मिसाल बनते देखना चाहते हैं."
ब्लेयर ने इस मौक़े पर अफ़ग़ानिस्तान में नैटो की भूमिका की प्रशंसा की और कहा कि शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद भी संगठन प्रासंगिक है.
मतभेद
फ्रांस के राष्ट्रपति शिराक ने कहा है कि इराक़ नैटो का अभियान नहीं है और वहाँ दख़लंदाज़ी करने के बुरे प्रभाव होंगे.
इसी तरह जर्मनी के चासंलर श्रोडर ने कहा कि उनका देश अपनी सेना इराक़ भेजने को तैयार नहीं है.
नैटो की शिखर बैठक में अमरीका और ब्रिटेन के नेताओं को छोड़कर ज़्यादातर शासनाध्यक्षों ने सतर्कता भरी प्रतिक्रिया दी है.
इराक़ के कुछ पड़ोसी देशों ने सत्ता के हस्तांतरण का स्वागत किया है और उम्मीद ज़ाहिर की है कि वहाँ हिंसा कुचक्र इससे रूक सकेगा.
अमरीका के दो प्रमुख सहयोगी देशों कुवैत और जॉर्डन ने आशा जताई है कि अमरीका के प्रयासों से इराक़ में शांति और स्थायित्व की स्थापना हो सकेगी.
दूसरी ओर, अमरीका की नीतियों का विरोध करने वाले सीरिया और ईरान ने नई अंतरिम सरकार से कहा है कि वह गठबंधन सैनिकों को देश से बाहर निकाले.