शनिवार, 26 जून, 2004 को 14:14 GMT तक के समाचार
उमर रज़ाक
बग़दाद से
बीबीसी अरबी सेवा के संवाददाता उमर रज़ाक इन दिनों इराक़ की राजधानी बग़दाद में है. वह अपना अनुभव रोज़ाना डायरी के रूप में लिख रहे हैं-
मंगलवार :: 29 जून
इराक़ में सत्ता के हस्तांतरण के बाद वाली रात बग़दाद में लोगों ने चैन की साँस ली. शहर की सड़कों पर पुलिस मौजूद थी मगर मैंने शहर में हलचल देखी.
बग़दाद के अल करादा में दुकानों में रात तक लोग आ रहे थे कबाब बेचने वाले भी देर तक व्यस्त रहे.
अशुरी फ़ैमिली क्लब ऐसी चंद जगहों में से एक है जो देर शाम तक खुला रहता है. बाहर से ये शांत सी जगह लगती है मगर जब मैं अपने दोस्तों के साथ क्लब के बाग़ीचे में पहुँचा तो वहाँ दर्जनों टेबलें भरी थीं और लोग गर्मी की रात का आनंद ले रहे थे.
क्लब के कई मेहमान शराब का मज़ा ले रहे थे, जो कि सद्दाम हुसैन के शासन काल में प्रतिबंधित थी.
इसके बाद हम कहरामना स्क्वायर पर स्थित एक रेस्तराँ में रात के भोजन के लिए गए और आधी रात तक भी वहाँ काफ़ी चहल-पहल थी.
लोग खाना खाने के साथ अरबी भाषा के समाचार चैनल देख रहे थे.
ऐसा लगता है कि सामान्य होती स्थिति और ख़ूनी संघर्ष बग़दाद में चलता रहेगा, कम से कम कुछ समय और.
सोमवार :: 28 जून - सत्ता हस्तांतरण का दिन
इराक़ियों में हमेशा की तरह यह उम्मीद भरी है कि अब वे अपनी रोज़ी रोटी कमा सकेंगे और ये सपने भी हैं कि उनके देश में सुरक्षा और शांति होगी.
सत्ता हस्तांतरण के मौक़े पर राजधानी बग़दाद में कोई समारोह नहीं हुए, कोई प्रदर्शन भी नहीं हुआ और इस अवसर पर कोई बैनर या झंडा भी नहीं लहराया.
अंतरिम सरकार के दफ़्तरों और इमारतों वाले ग्रीन ज़ोन यानी हरित क्षेत्र में कुछ इमारतों पर अलबत्ता कुछ झंडे ज़रूर नज़र आए. सत्ता हस्तांतरण दरअसल उस समय चुपके-चुपके हो गया जब इराक़ी लोग सोकर भी नहीं उठे थे. यह सबके लिए एक चौंकाने वाली बात थी.
जिन इराक़ियों से मैं मिला, उनका बहुत आम सा सपना था.
एक बुज़ुर्ग महिला अपने आँसुओं को पोंछते हुए कहती थीं, "मैं अल्लाह से यही दुआ करती हूँ कि देश में कुछ अच्छा हो. हम अपने नौजवानों को अपने साथ देखना चाहते हैं. हम फिर से यह नहीं देखना चाहते कि हमारे नौजवान मरने लगें."
एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति को सत्ता हस्तांतरण सिर्फ़ एक दिखावा लगा, "अमरीकी नियंत्रण में रहकर अंतरिम प्रधानमंत्री भला स्वतंत्र फ़ैसले कैसे ले सकता है?"
मैंने एक नौजवान से नई सरकार से उसकी उम्मीदों के बारे में पूछा तो उसका जवाब था, "उन्हें शराबख़ानों को फिर से खोलने का आदेश देना चाहिए."
जो कुछ भी हो रहा है, इराक़ी उसके बारे में अनजान नहीं हैं लेकिन अब वे कोई उम्मीद करने से पहले बहुत सतर्क रहने लगे हैं.
रविवार :: 27 जून
इराक़ पर अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के क़ब्ज़े के बाद से ही ग्रीन ज़ोन यानी हरित क्षेत्र में बना हुआ मुख्यालय इराक़ पर अमरीकी प्रभाव का प्रतीक रहा है.
इस हरित क्षेत्र में अमरीकी दूतावास, पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का एक महल शामिल है. इराक़ में अमरीकी प्रशासक प़ॉल ब्रेमर इसी महल में रहते थे.
हरित क्षेत्र में एक छोटा महल भी है जिसके बारे में कहा जाता है की वह सद्दाम हुसैन के एक दामाद हुसैन कामिल का था जो 1995 में जॉर्डन चले गए थे. उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने पश्चिमी देशों को इराक़ के सैन्य रहस्य खोले.
हुसैन कामिल को इराक़ लौटने की शर्त पर माफ़ी देने की बात कही गई थी. वह लौटे भी लेकिन कुछ दिन बाद उनके भाई के साथ उनकी भी हत्या कर दी गई.
यह छोटा सा महल इराक़ी अंतरिम शासकीय परिषद का मुख्यालय बना. यह परिषद जून के प्रथम सप्ताह में भंग कर दी गई थी.
मैंने हरित क्षेत्र का दौरा किया जिसे इराक़ी लोग मज़ाक बनाते हुए अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी 'सीआईए की रियासत' कहते हैं.
हमें बताया गया कि सत्ता हस्तांतरण के बाद हरित क्षेत्र सामान्य परिवहन के लिए खोल दिया जाएगा.
बाद में मैंने सुना कि अमरीका अपना दूतावास इसी क्षेत्र में रखना चाहता है क्योंकि सुरक्षा कारणों से दूतावास किसी अन्य क्षेत्र में नहीं बनाया जा सकता.
शनिवार :: 26 जून
मैं बग़दाद की गलियों में घूमते हुए सहज नहीं महसूस करता क्योंकि कार बम और अन्य विस्फोटक कहीं भी और किसी भी समय फट सकते हैं.
जब सूर्यास्त होता है बग़दाद में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से घट कर 28 डिग्री तक आ जाता है. और इस कारण कुछ लोग डर को भूल बाहर निकल पाते हैं. हो सकता है वो इस लिए भी ऐसा करते हों कि उन्हें ख़तरे की आदत पड़ गई हो.
मैंने रात के खाने के लिए अपने सहयोगियों के साथ अल-ग़ौता रेस्तराँ में गया. यह उन कुछ रेस्तराँ में से है जो 11 बजे रात तक खुले रहते हैं.
वहाँ मैंने पाया कई इराक़ी परिवार रेस्तराँ की बगिया में खाने का आनंद ले रहे हैं.
बग़दाद के लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर शाम गुजारते देखने से लगता है कि शायद सुरक्षा व्यवस्था की हालत ठीक हो रही है, लेकिन क्या आने वाले दिनों में भी ऐसा देखने को मिलेगा.
शुक्रवार :: 25 जून
जैसे-जैसे इराक़ में सत्ता हस्तांतरण की तिथि क़रीब आती जा रही है, यहाँ तरह-तरह की अफ़वाहों का बाज़ारा गर्म होता जा रहा है.
कुछ लोगों का यह मानना है कि सुरक्षा का मामला अमरीका से इराक़ियों को हस्तांतरित किए जाते ही देश में लूटमार मच जाएगी.
तो कुछ अन्य का मानना है कि लुटेरों को देखते ही गोली मारने के आदेश के साथ मारक दस्ते सक्रिय हो जाएँगे.
अंतरिम इराक़ी सरकार इस तरह की अफ़वाहों पर लगाम लगाने की हरसंभव कोशिश कर रही है. अंतरिम सरकार लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि 30 जून का दिन ख़ुशियाँ मनाने का होगा, आँसू बहाने का नहीं.
आज के सारे इराक़ी अख़बारों के पिछले पेज पर सिर्फ़ एक विज्ञापन है जिसमें कहा गया है कि 30 जून को हम अपना घर वापस पा रहे हैं.
विज्ञापन में इराक़ के नक्शे के साथ एक आँख का चित्र बनाया गया है, पारंपरिक रूप से यह दिखाने के लिए कि ईश्वर देश को बुरी नज़र से बचाएँ.
हर कोई चिंतित होकर सत्ता हस्तांतरण की प्रतीक्षा कर रहा है.
इस बीच अख़बारों में इस मौक़े पर बधाइयाँ छप रही हैं, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और हमले भी बढ़ गए हैं.
मुझे नहीं पता कि क्यों इराक़ियों को ख़ुशी होगी.
गुरुवार :: 24 जून
मैं छह महीने बाद बग़दाद में रिपोर्टिंग के लिए दोबारा आया हूँ.
जॉर्डन की राजधानी में अम्मान से मैंने बग़दाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उड़ान ली जो कि पहले सद्दाम एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता था.
बग़दाद के लिए यही एकमात्र सिविलियन उड़ान है.
इराक़ी राजधानी में अमरीकी सेना का सबसे बड़ा जमाव एयरपोर्ट के आसपास ही है.
विमान के 70 यात्रियों में मुझे सिर्फ़ एक इराक़ी परिवार दिखा जो शायद जॉर्डन में छुट्टियाँ बिता कर लौट रहा था.
बाकी या तो व्यवसायी थे या पत्रकार.
सबसे ज़्यादा डर विमान के उतरने समय लगा. पायलट ने पहले ही कह दिया था कि जानबूझकर या अनजाने में की गई फ़ायरिंग से बचने के लिए वो अचानक फ़ोकर-28 विमान की नीचे लाएँगे.