मंगलवार, 08 जून, 2004 को 16:05 GMT तक के समाचार
राजेश प्रियदर्शी
लक्ष्मी-गणेश छपा टीशर्ट पहनकर शिवजी की तस्वीर वाले झोले में से निकालकर बियर पीते व्यक्ति का दिखना लंदन में कोई बहुत दुर्लभ दृश्य नहीं है.
कई वर्षों से भारतीय चीज़ें, ख़ास तौर पर बिंदी, चूड़ियाँ और पायल जैसे गहने और राजस्थानी कुर्ते ब्रिटेन में फ़ैशन में रहे हैं लेकिन लक्ष्मी और सरस्वती की तस्वीर वाली बिकनी पहले कभी नहीं दिखी.
आम से अलग हटकर कुछ ख़ास करने की कोशिश में ही लंदन के एक मशहूर डिपार्टमेंटल स्टोर ने 'बीच पर विहार करने वाली देवियों के लिए' हिंदू देवियों के प्रिंट वाली बिकनी बेचनी शुरू कर दी लेकिन जल्दी ही उन्हें बिक्री बंद करनी पड़ी.
एक नामी-गिरामी इतालवी डिज़ाइनर रॉबेर्तो कोवाली ने इन कपड़ों का डिज़ाइन तैयार किया था और इन्हें काफ़ी महँगे दामों पर बेचा जा रहा था.
हिंदू ह्यूमनराइट्स नाम के एक संगठन के विरोध के बाद डिपार्टमेंटल स्टोर हैरड्स ने इसकी बिक्री बंद करने की घोषणा की है.
संगठन की प्रवक्ता शीला चर्च कहती हैं, "जब हमें पता चला कि हैरड्स में ऐसे कपड़ों की बिक्री चल रही है तो हमने इसका विरोध किया, इस तरह से हिंदू धर्म और उसके मानने वालों का अपमान हमसे सहन नहीं हुआ."
प्रवक्ता ने कहा, "जिस लक्ष्मी और सरस्वती की हिंदू पूजा करते हैं उनका इस तरह का इस्तेमाल आख़िर कोई कैसे कर सकता है, हमने सैकड़ों के हिंदुओं के हस्ताक्षर के साथ हैरड्स को अपना विरोधपत्र भेजा था."
शुरूआत
'धार्मिक बिकनी' विवाद रविवार को शुरू हुआ जब लंदन में काम करने वाले एक भारतीय अमिताभ सोनी ने संयोगवश हैरड्स का चक्कर लगाया, वे कहते हैं, "मैं तो दंग रह गया जिस तस्वीर के ज़मीन पर गिर जाने पर हम सिर से लगाते हैं वही तस्वीर पैंटी पर कैसे हो सकती है."
सोनी कहते हैं, "मैंने फ़ौरन इसकी बिक्री रूकवाने का संकल्प किया और हैरड्स के कर्मचारियों ने मेरी बात नहीं सुनी तो मैंने हिंदू ह्यूमनराइट्स से संपर्क किया."
अपने मँहगे सामानों और खूबसूरत सज्जा के लिए मशहूर हैरड्स की ओर से उनकी वरिष्ठ अधिकारी बेकी स्मिथ ने इतना ही कहा, "हमें सोमवार को ही लोगों के टेलीफ़ोन से इसका पता चला, हमने आपत्तिजनक वस्तुओं की बिक्री पूरी तरह से बंद करने का फ़ैसला किया है."
हैरड्स ने अपने एक बयान में इस ग़लती के लिए माफ़ी भी माँगी है, "हम अपने उन ग्राहकों से माफ़ी चाहते हैं जिन्हें इन सामानों की बिक्री से दुख पहुँचा है या उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची."
कई विवाद
पश्चिमी देशों में इस तरह का विवाद कोई नया नहीं है, पहले भी इसी संगठन ने इस्माइल मर्चेंट की फ़िल्म 'शक्ति' में टीना टर्नर को देवी काली की भूमिका दिए जाने का जमकर विरोध किया था.
लंदन के एक अन्य डिपार्टमेंटल स्टोर को पिछले साल चप्पलों पर हिंदू देवताओं की तस्वीरें छापने के लिए माफ़ी माँगनी पड़ी थी.
टॉयलेट की सीटों पर गणेश की तस्वीर का मामला हो या फिर केक और कुकी पर ऊँ और स्वास्तिक के निशान, विवाद अक्सर होते रहते हैं.
ये विवाद हिंदू धर्म या पश्चिम तक ही सीमित नहीं हैं, भारत में एक जूता बनाने वाली कंपनी को अपना प्रचार अभियान वापस लेना पड़ा क्योंकि जूते पर क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरूद्दीन के ऑटोग्राफ़ थे.
इस्लामी संगठनों ने इस आधार पर विरोध किया था कि 'मोहम्मद' शब्द जूते पर नहीं लिखा जा सकता.
अब अगले विवाद के सामने आने का इंतज़ार कीजिए, शायद ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा.