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शनिवार, 05 जून, 2004 को 05:07 GMT तक के समाचार

बुश को यूरोप के साथ की उम्मीद

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश संयुक्त राष्ट्र में इराक़ से जुड़े प्रस्ताव के लिए यूरोप की यात्रा के दौरान समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं.

इराक़ में हुए युद्ध के कट्टर विरोधी रहे फ़्रांस के लिए रवाना होने से पहले बुश युद्ध के समर्थक इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बरलुस्कोनी से शनिवार सुबह बातचीत करेंगे.

इससे पहले शुक्रवार को जब वह पोप से मिलने गए तो रोम में हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और उन्हें अमरीका के राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की.

लोगों ने 'बुश वापस जाओ' और 'नो बुश, नो वार' के नारे लगाए और शहर मुख्य चौराहे पर बड़ी सभा आयोजित की.

उधर बुश से मुलाक़ात में पोप ने कहा कि वह इराक़ को उसकी संप्रभुता वापस करने की प्रक्रिया तेज़ करें.

कूटनीतिक प्रयास

बीबीसी के यूरोप संवाददाता टिम फ़्रैंक्स के अनुसार शनिवार का दिन सार्वजनिक समारोहों और निजी स्तर पर कूटनीति का होगा.
बुश और पोप
पोप ने इराक़ी संप्रभुता का सवाल उठाया

सुबह बरलुस्कोनी से मिलने के बाद राष्ट्रपति बुश एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करेंगे.

इसके बाद ही वह फ़्रांस के लिए रवाना होंगे. फ़्रांस के राष्ट्रपति ज्याक़ शिराक़ इराक़ पर हुए हमले के कट्टर विरोधी रहे हैं.

मगर अमरीकी राष्ट्रपति की कोशिश होगी कि इराक़ के भविष्य को लेकर आम सहमति बनाई जा सके.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका और ब्रिटेन ने एक प्रस्ताव रखा है जिसमें इराक़ की अंतरिम सरकार को मान्यता देने के साथ ही वहाँ बहुराष्ट्रीय सेना की मौजूदगी को भी समर्थन दिया गया है.

फ़्रांस, रूस और चीन का कहना है कि इराक़ में सैनिक कार्रवाइयों पर इराक़ का ही अधिकार होना चाहिए.

रोम में विरोध

बुश के विरोध में कई प्रदर्शनकारियों ने आतिशबाज़ियाँ चलाईं और रंग-बिरंगी धुएँ वाले गैस कैन खोले, काफ़ी शोर-शराबा भी हुआ.
बुश का विरोध
राष्ट्रपति बुश के विरोध में रोम में लोग सड़कों पर उतर आए

इस विरोध प्रदर्शन के आयोजकों का दावा है कि लगभग डेढ़ लाख लोग इसमें शामिल हुए जबकि पुलिस उनकी संख्या 25 हज़ार बता रही है.

राष्ट्रपति बुश रोम को नात्सी सैनिकों से मुक्त कराए जाने की 60वीं सालगिरह के मौक़े पर वहाँ पहुँचे हैं, जहाँ उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

इटली के सैनिक इराक़ में मौजूद हैं और बर्लुस्कोनी ने कहा है कि उनके सैनिकों के अमरीकी सैनिकों से पहले स्वदेश लौटने का कोई सवाल नहीं है.

इस प्रदर्शन के लिए देश के कोने-कोने से प्रदर्शनकारी रोम पहुँचे थे और वे अपने साथ इंद्रधनुषी झंडे लेकर आए थे जिन पर 'पीस' यानी शांति लिखा था.

कुछ नक़ाबपोश प्रदर्शनकारियों ने कचरे के डिब्बों में आग लगा दी और सरकारी इमारतों पर आतिशबाज़ी फेंककर अपना विरोध प्रदर्शित किया.