शनिवार, 29 मई, 2004 को 13:36 GMT तक के समाचार
अमरीका की एक समाचार एजेंसी ने दावा किया है कि उसके पास ऐसे सबूत हैं जिनसे पता चलता है कि इराक़ में बंदियों के साथ दुर्व्यवहार अबू ग़रेब के अलावा चार और जगहों पर भी हुआ.
एसोसिएटेड प्रेस या एपी के अनुसार दुर्व्यवहार के सबूत नासिरिया में मरीन सैनिकों के ठिकाने के अलावा बग़दाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, क़ाएम और समारा के सैनिक ठिकानों से भी मिले हैं.
बंदियों को कथित तौर पर पीटा गया और रेगिस्तान की चिलचिलाती धूप में देर तक खड़े रखा गया.
एपी ने अदालती कार्यवाही के काग़ज़ और पूछताछ की जानकारी प्राप्त की है.
अबू ग़रेब जेल सद्दाम हुसैन के शासनकाल में ही क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार के लिए बदनाम थी.
बाद में जब वहाँ से अमरीकी सैनिकों के भी बंदियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरें आईं तो पूरी दुनिया में इसकी काफ़ी निंदा हुई.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने पिछले दिनों ये घोषणा की थी कि अबू ग़रेब जेल को तोड़ा जाएगा.
दावा
एपी ने जो सैनिक दस्तावेज़ देखे हैं उसके अनुसार अन्य जगहों पर हिरासत में लिए गए कम से कम दो बंदियों ने चोट की वजह से दम तोड़ दिया.
दस्तावेजों के अनुसार नासिरिया के निकट व्हाइटहॉर्स कैंप में सुरक्षाकर्मियों को आदेश दिए गए कि बंदियों को पूछताछ के लिए तैयार किया जाए.
तैयार करने के क्रम में उन बंदियों को 49 डिग्री सेल्सियस तापमान में नक़ाब डालकर एकबार में लगभग 50 मिनट तक खड़ा रखा जाता था.
ऐसा 10 घंटे तक किया गया जिसमें एक बंदी की मौत भी हो गई.
क़ाएम के निकट एक कैंप में पूछताछ करने वालों ने एक पूर्व इराक़ी जनरल आबिद हामिद मौहुश को सोने के लिए इस्तेमाल होने वाले एक बैग में बंद कर दिया गया.
उसके बाद उनका मुँह भी बंद कर दिया गया और सैनिक उनके सीने पर बैठ गए. आख़िरकार उन्होंने भी दम तोड़ दिया.
समारा के निकट एक कैंप में बंदियों को पीटा गया और उनके बाल खींचे गए. बग़दाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के कैंप में बंदियों को कथित तौर पर पीटा गया और कथिन स्थितियों में रखा गया.
दो मरीन सैनिकों पर जून 2003 में व्हाइटहॉर्स कैंप में हुई कुछ मौतों से जुड़े मामले चल रहे हैं हालाँकि किसी पर भी हत्या का कोई आरोप नहीं है.
और दावे
एक अन्य घटनाक्रम में न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार का कहना है कि ग्वांतानामो कैंप में पूछताछ करनेवालों ने अबू ग़रेब में प्रमुख भूमिका निभाई.
ग्वांतानामो में पूछताछ करने वालों को पिछले साल उस कैंप के प्रमुख जनरल ज्यॉफ़ मिलर ने इराक़ भेजा था.
इसके अलावा ख़ुद जनरल मिलर को इराक़ भेजा गया था ताकि वह वहाँ हो रही पूछताछ के साथ ही बंदियों को रखने के तरीकों में सुधार के बारे में बता सकें.