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शुक्रवार, 28 मई, 2004 को 13:58 GMT तक के समाचार

अलावी प्रधानमंत्री होंगे, अमरीका का समर्थन

इराक़ में शिया नेता ईयाद अलावी अगली अंतरिम सरकार के प्रमुख होंगे.

शुक्रवार को अलावी के नाम पर सहमति बनी और वे 30 जून के बाद इराक़ में बनने वाली नई अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री बनेंगे.

अंतरिम शासकीय परिषद ने शुक्रवार को इराक़ में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर के साथ एक विशेष बैठक कर अलावी को नया प्रधानमंत्री चुना.

अमरीका ने शासकीय परिषद के फ़ैसले का समर्थन किया है.

अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय के प्रवक्ता ने अलावी को एक योग्य नेता बताया है लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने इस पर सतर्कतापूर्ण प्रतिक्रिया दी है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र को उम्मीद थी कि इराक़ में उसके दूत लख़दर ब्राहिमी
अंतरिम सरकार की घोषणा करेंगे लेकिन शासकीय परिषद ने बाज़ी मार ली है.

अंतरिम शासकीय परिषद का गठन अमरीकी प्रशासन ने किया था.

ईयाद अलावी इराक़ी अंतरिम शासकीय परिषद में शामिल एक प्रमुख पार्टी के सदस्य हैं जिसका परिषद में ख़ासा प्रभाव है.

बीबीसी के मध्य पूर्व विश्लेषक का कहना है ईयाद अलावी की नियुक्ति लख़दर ब्राहिमी की हार है क्योंकि ब्राहिमी इस पद पर किसी तकनीकी विशेषज्ञ को नियुक्त करना चाहते थे.

ईयाद अलावी ने 1970 के दशक में इराक़ी शासकों का विरोध शुरू कर दिया था.

ईयाद अलावी का शिया होना एक महत्वपूर्ण बात है क्योंकि इराक़ में शिया बहुसंख्यक हैं और वे सत्ता में अपने हिस्से की माँग करते रहे हैं.

उधर ख़बर है कि कूफ़ा शहर में शिया नेता मुक्तदा अल सद्र के वफ़ादार लड़ाकों और अमरीकी सैनिकों के बीच ज़ोरदार लड़ाई चल रही है.

लड़ाई

इराक़ में अमरीकी सेनाओं और शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों के बीच शुक्रवार को ताज़ा लड़ाई भड़क उठी है जिसमें कम से कम तीन लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

शुक्रवार को मुक़्तदा अल सद्र के हज़ारों समर्थक उस मस्जिद के आसपास एकत्र हुए हैं जहाँ सद्र आम तौर पर जुमे की नमाज़ से पहले ख़ुतबा यानी धार्मिक भाषण देते हैं.

लेकिन इस शुक्रवार को सद्र ख़ुद उस मस्जिद में नहीं आए और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया है कि अमरीका ने गुरूवार को हुआ समजौता तोड़कर सद्र को गिरफ़्तार करने की कोशिश की है.

सद्र के समर्थकों ने कहा है कि अमरीकी सेनाओं ने कूफ़ा में नया हमला शुरू किया है लेकिन कुछ अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि लड़ाई तब शुरू हुई जब सद्र के समर्थकों ने अमरीकी सैनिकों पर गोलीबारी शुरू की.