गुरुवार, 20 मई, 2004 को 20:24 GMT तक के समाचार
बीबीसी हिंदी संवाददाता विनीता द्विवेदी
लंदन में भारतीय खाने के जितने रेंस्तरां हैं, उतने शायद भारत के चारों महानगरों में भी नहीं हैं.
भारतीय ‘करी’ अंग्रेज़ों का पसंदीदा खाना बन गया है और इंग्लैंड के दूरदराज़ के नगरों में भी भारतीय खाना परोसा जाता है.
भारतीय उपमहाद्वीप का खाना परोसने में जुटे नौ हज़ार से अधिक रेस्तरां हर साल करीब ढाई ख़रब रूपए का व्यापार करते हैं.
माना जाता है कि इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया भारतीय खाने की शौक़ीन थीं. उनका रसोइया अब्दुल क़रीम आख़िरी दम तक उनकी सेवा में रहा.
राजघराने की बात तो और थी लेकिन उस ज़माने में इंग्लैंड के आम लोगों के लिए भारतीय व्यंजन चखने का कोई ज़रिया नहीं था.
पर समय बदला, अँग्रेज़ वापस लौट आए, लेकिन वहां के खाने का स्वाद साथ ले आए.
और फिर भारतीय उपमहाद्वीप के रहने वाले भी जब इंग्लैंड में बसने लगे तो अंग्रेज़ों के इसी प्रेम को भांप कर शुरू हुए भारतीय खाने के रेस्तरां.
लोकप्रिय भोजन
आज पूरे इंग्लैंड में नौ हज़ार ऐसे रेस्तरां हैं जो केवल भारतीय उपमहाद्वीप का खाना परोसते हैं.
ताज ग्रुप ऑफ़ होटल ने 1984 में लंदन में बॉंबे ब्रासरी नाम का रेस्तरां खोला था और आज 21 साल बाद भी वो एक काफ़ी मंहगा लेकिन सफल रेस्तरां हैं.
उसके प्रबंध निदेशक आदि मोदी कहते हैं, "भारतीय भोजन इंग्लैंड का राष्ट्रीय भोजन है."
उनका कहना है कि यह भोजन न केवल स्वादिष्ट होता बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा है और इसीलिए इतना लोकप्रिय है.
बॉंबें ब्रासरी के प्रमुख रसोइया विक्रम सुंदरम का कहना है कि अंग्रेज़ों के स्वाद के मुताबिक़ उन्हें अपने पकवानों में केवल मामूली फेरबदल ही करना पड़ता है.
लेकिन उनका कहना है कि ज़्यादातर पकवान बनाने में वे वही विधि इस्तेमाल करते हैं जिसे भारत में इस्तेमाल किया जाता है.
'करी' प्रेम
अंग्रेज़ों के 'करी' प्रेम की हद यह है कि इंग्लैंड में जब अँग्रेज़ बाहर 'डिनर' के लिए निकलते हैं तो उनमें से दो-तिहाई लोग भारतीय खाना परोसने वाले किसी रेस्तरां में ही जाते हैं.
यहाँ लंदन आए भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी दिनेश मोंगिया का कहना है कि उन्हें लंदन में कभी भारतीय खाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ता.
उनका कहना है, "मैं शाकाहारी हूँ लेकिन मुझे अपने पंसद का घर जैसा, पंजाबी शाकाहारी खाना यहाँ मिल जाता है."
लेकिन देसी खाने का मतलब केवल बांग्लादेशी खाना भी हो सकता है.
इंग्लैंड में जो रेस्तरां 'भारतीय' खाना परोसते हैं उनमें से अधिकतर रेस्तरां तो बांग्लादेशी चलाते हैं.
चिकन टिक्का मसाला, पोपाडम (पापड़), अनियन भाजी (प्याज़ के पकौड़े), जालफ़्रेज़ी, मैंगो चटनी (आम की चटनी), पिलाओ राइस (पुलाओ) जैसे व्यजंन ज़्यादातर रेस्तरां के 'मैन्यू' का हिस्सा हैं.
लंदन के साउथॉल इलाके के मधु रेस्तरां के मालिक संजय आंनद कहते हैं कि भारतीय रेस्ट्रांओं के 90 प्रतिशत ग्राहक अँग्रेज़ ही होते हैं.
उनका कहना है, "एक दो बार भारतीय खाना खाने के बाद अंग्रेज़ों को भारतीय खाने की आदत पड़ जाती है."
'करी' गाइड
संजय आंनद के रेस्तरां को कुछ दिन पहले लंदन के एक आलीशान पाँच सितारो होटल में आयोजित एक समारोह में इस साल के बेस्ट इंडियन रेस्तरां का पुरस्कार दिया गया है.
गुरूवार को लंदन के मेयर केन लिंविंगस्टन ने अपने चुनाव प्रचार के लिए वहीं पर एक पत्रकार सम्मेलन भी आयोजित किया.
पैट चैपमन लंदन के सर्वश्रेष्ठ भारतीय रेस्तरां पर किताब लिखते हैं जिसका नाम है 'बेस्ट करी गाईड.'
हर दो साल बाद छपने वाली इस क़िताब में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के सौ बेहतरीन रेस्तरां के बारे में लिखा जाता है.
अंग्रेज़ों के ज़माने में पैट चैपमन के परिवार की छह पुश्तें भारत में रह चुकी हैं.
उनका कहना था, "मैं लंदन में ज़रूर पैदा हुआ लेकिन मेरी दादी मां ने भारतीय खाना बनाना बहुत अच्छी तरह से सीख लिया था. मैं बचपन से वही खाना खाता रहा हूँ और अब उसके बग़ैर रह नहीं सकता."
63 साल से पैट चैपमन भारतीय खाने के दीवाने हैं और कहते हैं मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, बंगलौर को मिलाकर भी भारतीय खाने के इतने रेस्तरां नहीं होंगे जितने अकेले लंदन में हैं.
जी हां, लंदन में अकले 16 सौ ऐसे रेस्तरां हैं और दिन प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ती जा रही है.