इराक़ में क़ैदियों के साथ अपमानजनक बर्ताव की तस्वीरें छापने वाले लंदन से प्रकाशित अख़बार डेली मिरर के संपादक ने कहा है कि उन्हें कुछ और तस्वीरें मिली हैं.
संपादक का कहना है कि जेल में क़ैदियों के साथ ब्रितानी सैनिकों के हाथों अपमानजनक बर्ताव का एक नया गवाह सामने आया है.
डेली मिरर के संपादक पीयर्स मोरगन का कहना है कि क्वीन्स लंकाशर रेजीमेंट का एक सैनिक के पास ऐसी शिकायतों का पुलिंदा है जिसमें क़ैदियों की बेहरमी से पिटाई भी शामिल है.
सैनिक का कहना है कि अलबत्ता यह काम चंद शैतानी फ़ितरत वाले सैनिकों का है.
उधर ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने भी बीबीसी को बताया है कि इस सैनिक ने इन दावों के बारे में सेना पुलिस से भी संपर्क किया है.
डेली मिरर के संपादक पीयर्स मोरगन ने फिर कहा है कि उन्होंने जो तस्वीरें छापी हैं उनसे यह साफ़ झलकता है कि सैनिकों ने क़ैदियों के साथ अपमानजनक बर्ताव किया है.
लेकिन सैन्य विशेषज्ञों ने इन तस्वीरों के सही होने के बारे में शक़ जताया था और कहा था कि तस्वीरों में दिखाए गए सैनिक मौजूदा सैन्य वर्दी और हथियारों से मेल नहीं खाते.
ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर कह चुके हैं कि इस तरह का बर्ताव को माफ़ नहीं किया सकता.
ब्रितानी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस मामले में अभी कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी इस तरह के बर्ताव के लिए गुरूवार को अफ़सोस जताया है.
गवाह
मिरर के संपादक ने कहा है कि यह सैनिक तस्वीरों में दिखाई गई घटना में शामिल नहीं था इसलिए वह तस्वीरों की पुष्टि नही कर सकता लेकिन उसने अन्य कई घटनाएं अपनी आँखों से देखी हैं.
यह सैनिक क्वीन्स लंकाशर रेजीमेंट का ही है और इन घटनाओं के समय पिछली गर्मियों में वह इसी रेजीमेंट में तैनात था.
मोरगन ने कहा कि इस सैनिक ने कम से कम चार मामलों का बहुत ही गंभीर विवरण बयान किया है जिससे साफ़ पता चलता है कि रेजीमेंट में कुछ सैनिकों ने इराक़ी क़ैदियों के साथ कैसा व्यवहार किया.
सैनिक ने दावा किया है कि इसमें छोटे-बड़े सैनिक अधिकारी शामिल थे जिनके इशारे पर यह सब हुआ.