http://www.bbcchindi.com

शेरॉन योजना में फेरबदल कर सकते हैं

इसराइल में ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि प्रधानमंत्री ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियों को हटाने की योजना में फेरबदल कर सकते हैं.

ग़ौरतलब है कि सत्ताधारी लिकुड पार्टी के के एक मतदान में अरियल शेरॉन की इस योजना को नामंज़ूर कर दिया गया है.

अब उपप्रधानमंत्री एमूद ओलमर्ट ने कहा है कि पार्टी की नामंज़ूरी के बाद इस योजना में फेरबदल किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि इस योजना पर आगे बढ़ने से रुकना नामुमकिन है इसलिए शेरॉन इसमें फेरबदल करके आगे बढ़ने से भी नहीं हिचकिचाएंगे.

येरूशलम में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि शेरॉन इस योजना में फेरबदल के बाद मंत्रिमंडल से मंज़ूरी दिलवाकर इसे संसद में पेश कर सकते है जहाँ उनकी सरकार बहुमत में है.

इस बीच सोमवार को ही संसद में अरियल शेरॉन की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया जो गिर गया.

प्रधानमंत्री शेरॉन की इस योजना में ग़ज़ा से इसराइली सैनिकों और क़रीब 7500 यहूदी बस्तियों को हटाने का प्रस्ताव है.

लेकिन फ़लस्तीनियों को आपत्ति है कि इस योजना में पश्चिमी तट और अन्य इलाक़ो में यहूदी बस्तियाँ हटाने के बारे में कुछ नहीं कहा गया है.

इसके अलावा इसराइल ने जिन फ़लस्तीनी इलाकों पर क़ब्ज़ा कर रखा है वहाँ से गए शरणार्थियों की वापसी के बारे में भी कुछ नहीं कहा गया है.

इन इलाक़ों से बाहर हुए बहुत से फ़लस्तीनी शरणार्थी अन्य अरब देशों में शिविरों में रह रहे हैं.

संकेत

जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिला है कि ज़्यादातर इसराइली प्रधानमंत्री शेरॉन की योजना का समर्थन कर रहे हैं लेकिन उनकी अपनी दक्षिणपंथी पार्टी के अधिकतर सदस्य इसका विरोध कर रहे हैं.

शेरॉन की योजना पर लिकुड पार्टी का मतदान
पार्टी ने योजना नामंज़ूर कर दी

अभी हाल में ही शेरॉन अमरीका की यात्रा पर गए थे और उन्हें इस योजना पर राष्ट्रपति बुश का भी समर्थन मिला था.

शेरॉन ने कहा था कि योजना अगर नामंज़ूर हुई तो न केवल देश एक राजनीतिक संकट में फँस जाएगा बल्कि अमरीका के साथ उसके रिश्ते भी प्रभावित होंगे.

इस योजना के तहत ग़ज़ा से क़रीब साढ़े सात हज़ार यहूदी बस्तियों को हटाने का तो प्रावधान है लेकिन पश्चिमी तट और पूर्वी यरूशलम में चार लाख यहूदी बस्तियों के बने रहने की बात कही गई है.

जिसका फ़लस्तीनी विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनके साथ अन्याय किया जा रहा है.