ब्रिटेन में रक्षा मंत्रालय ने इराक़ी क़ैदियों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार के मामले में जाँच शुरू कर दी है.
इस मामले में पहले से ही अमरीकी सैनिकों पर आरोप लग रहे थे. लेकिन अब ब्रितानी सैनिक भी इसकी चपेट में आ गए हैं.
ब्रिटेन के अख़बार डेली मिरर ने इस संबंध में तस्वीरें छापी हैं. अख़बार का दावा है कि तस्वीरों में ब्रितानी सैनिक क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा था कि इन आरोपों की जाँच बहुत ही गंभीरता से होनी चाहिए.
ब्रिटेन के वरिष्ठ सैनिक जनरल सर माइक जैक्सन का कहना है कि अगर ये सैनिक दोषी हैं तो उन्हें सैनिक वर्दी पहनने का कोई हक़ नहीं.
माइक जैक्सन ने कहा कि यह घटना बहुत ही शर्मनाक है.
इससे पहले ब्रितानी सरकार ने उन तस्वीरों को भयावह बताया है जिनमें अमरीकी सैनिकों को इराक़ी क़ैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार करते दिखाया गया है.
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि जिस तरह सैनिक नंगे क़ैदियों को यंत्रणा दे रहे हैं वह अमरीका की अगुआई वाली गठबंधन सेना की नीतियों के ख़िलाफ़ है.
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अबू ग़रीब जेल में क़ैदियों के साथ कुछ सैनिकों की बदसलूकी का मतलब ये नहीं कि गठबंधन के सभी सैनिक ऐसे ही हैं.
डेली मिरर का कहना है कि आठ घंटे तक इस क़ैदी को यातना दी गई जिसमें उसका जबड़ा टूट गया.
अख़बार का ये भी कहना है कि इस क़ैदी को चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया गया और उसके बारे में नहीं पता है कि वह ज़िंदा भी है या नहीं.
इराक़ के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लख़दर ब्राहमी ने इराक़ी क़ैदियों के साथ इस तरह के बर्ताव को अस्वीकार्य बताया है.
साथ ही उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह माँग करने का पूरा अधिकार है कि अमरीका दोषियों को सख़्त से सख़्त सज़ा दे.
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी कहा है कि वह ऐसी तस्वीरों से बहुत दुखी हुए हैं.