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मुशर्रफ़ की कश्मीर योजना को धक्का

कश्मीरी चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा के पूर्व मुखिया हाफ़िज़ सईद का कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय शासन को समाप्त करने का एक मात्र रास्ता 'जेहाद' ही है.

सईद ने कहा है कि जेहाद के एक हज़ार से भी ज़्यादा समर्थकों ने 'कश्मीर की आज़ादी' के लिए एक सच्चा 'रोडमैप' तैयार किया है.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में गुरूवार को एक रैली को संबोधित करते हुए हाफ़िज़ सईद ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर आरोप लगाया है कि वह भारत के साथ शांति वार्ता शुरू करके कश्मीर में चल रहे सशस्त्र संघर्ष की अहमियत कम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि परवेज़ मुशर्रफ़ भारत के साथ सांस्कृतिक संबंध सुधारने और लोगों के आने-जाने में ढील देकर ठीक काम नहीं कर रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि भारत अपने यहाँ हुए अनेक चरमपंथी हमलों के लिए लश्करे तैबा को ज़िम्मेदार बताता है जिनमें दिसंबर 2001 में संसद पर हुआ हमला भी शामिल है.

ग़ौरतलब है कि इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव बहुत बढ़ गया था और नौबत युद्ध तक भी जा पहुँची थी.

सईद ने कहा, "कश्मीर के बाक़ी हिस्से को भारतीय सुरक्षा बलों से नियंत्रण से आज़ाद कराने का एक मात्र रास्ता जेहाद ही हो सकता है."

उन्होंने कहा कि कश्मीरी चरमपंथी अपनी गतिविधियाँ जारी रखने के लिए संकल्पबद्ध हैं और बहुत से चरमपंथियों ने तो भारत प्रशासित कश्मीर में अपनी कार्रवाई दिखाकर यह साबित भी कर दिया है.

लेकिन भारत का कहना है कि इस साल के शुरू में जब से पाकिस्तान के साथ दोस्ताना माहौल बनना शुरू हुआ है तब से सीमापार से चरमपंथियों की घुसपैठ में काफ़ी कमी हुई है.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने दो साल पहले लश्करे तैबा पर पाबंदी लगा दी थी जिसके बाद हाफ़िज़ सईद ने जमात-उद-दावा नाम का संगठन बनाया और अब वह उसके मुखिया हैं.

अब यह संगठन भी पाकिस्तान सरकार की निगरानी में है.