इराक़ में अमरीकी सैनिक अभियानों का कई स्तर पर विरोध बढ़ता ही जा रहा है.
ग़ौरतलब है कि इराक़ में अमरीकी गठजोड़ वाली सेनाओं को को शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों व्यापक विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने इसे एक मुश्किल दौर बताया है.
पॉवेल ने कहा है कि इराक़ में सुन्नियों और शियाओं का विरोध उम्मीद से कहीं ज़्यादा मज़बूत निकला है.
लेकिन पॉवेल ने यह फिर दोहराया कि इराक़ की संप्रभुता और सत्ता इराक़ियों को इसी साल जून तक सौंपने की समय सीमा पर अमल किया जाएगा.
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी अपने सहयोगी देशों स्पेन, पोलैंड और अल सल्वाडोर के नेताओं से फ़ोन पर संपर्क किया है.
ग़ौरतलब है कि इन देशों के सैनिक इराक़ में अमरीका का सहयोग कर रहे हैं.
वाशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बुश अपने सहयोगी देशों को इसलिए राज़ी रखने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं वे इराक़ से अपनी सेनाएं हटाना शुरू ना कर दें.
विरोध का दायरा
कुछ देशों ने भी अमरीकी सेनाओं की कार्रवाई को अत्यधिक बल प्रयोग बताया है.
इराक़ की नियुक्त की हुई अंतरिम शासकीय परिषद के दो सदस्यों ने अमरीकी सेनाओं की कार्रवाई का विरोध करते हुए इस्तीफ़ा भी दे दिया है.
परिषद के एक सदस्य ने फ़लूजा में अमरीकी कार्रवाई को 'नरसंहार' बताया है.
वहाँ डॉक्टरों का कहना है कि फ़लूजा में अमरीकी गठजोड़ वाली सेनाओं की कार्रवाई में इस सप्ताह क़रीब 450 लोग मारे गए हैं और 1000 से ज़्यादा घायल हुए हैं.
अमरीका ने फ़लूजा में संघर्ष विराम की घोषणा की है लेकिन रात होने पर लड़ाई जारी रहने की ख़बरें मिली हैं.
अन्य अनेक सदस्यों ने भी सुन्नी बहुल क्षेत्र फ़लूजा में अमरीकी गठजोड़ वाली सेनाओं की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा है कि ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया जा रहा है.
परिषद में संकट
परिषद के एक सुन्नी सदस्य ग़ाज़ी आजिल अल यावर ने कहा है कि अगर अमरीका ने फ़लूजा संकट का शांतिपूर्ण हल नहीं निकाला तो वह इस्तीफ़ा देने के लिए बिल्कुल तैयार बैठे हैं.
![]() अमरीकी सेनाओं के विरोध का दायरा बढ़ रहा है |
शासकीय परिषद के एक सदस्य अब्दुल करीम महमदावी ने शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र से मुलाक़ात के बाद कहा है कि वह परिषद की बैठकों में फिलहाल भाग लेना बंद कर रहे हैं.
और यह ख़ासतौर से इराक़ में सद्दाम हुसैन का शासन समाप्त होने का एक साल पूरा होने के मौक़े पर हो रहा है.
शिया बाग़ी नेता मुक़्तदा अल सद्र ने जुमे की नमाज़ के समय ख़ुतबा करते हुए कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश इस समय इराक़ के लोगों के विरोध का सामना कर रहे हैं और उन्हें बग़ावत रोकने के लिए अपनी सेनाएं तुरंत हटा लेनी चाहिए.
अमरीकी गठजोड़ वाली सेनाएं कम से कम पाँच स्थानों पर शिया और सुन्नी लड़ाकों का सामना कर रही हैं.
रुस ने कहा है कि अमरीकी को इराक़ में 'ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग' को रोक देना चाहिए.
रूस ने यह भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को इराक़ के मामलों में तब तक शामिल नहीं होना चाहिए जब तक कि वहाँ सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अमरीका के हाथों में है.