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मित्र राष्ट्रों के लिए भी फ़िंगरप्रिंट्स क़ानून

अमेरिका ने फ़ैसला किया है कि 27 और सहयोगी देशों के नागरिकों को भी अमरीका आने पर फिंगरप्रिंट्स यानी अपनी उंगलियों की छाप देनी होगी.

27 देशों के नागरिकों के लिए यह नई व्यवस्था अक्तूबर से लागू हो जाएगी.

इसका साफ़ सा मतलब है कि अब अमरीका पहुँचने में और ज़्यादा देरी होगी.

लेकिन मित्र देशों के लोग अमरीका में पहले की ही तरह बिना वीज़ा के दाख़िल हो सकेंगे.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि आतंकवादी हमलों के ख़तरों को कम करने के लिए ये क़दम उठाना ज़रूरी है.

ख़बर है कि अमरीका ने इस आशंका से यह व्यवस्था लागू करने का फ़ैसला किया है कि बिना वीज़ा के अमरीका पहुँचने की सुविधा वाले देश अक्तूबर की तय समय-सीमा तक अत्याधुनिक पासपोर्ट जारी नहीं कर पाएँगे.

ब्रिटेन ने 2005 के मध्य तक 'बायोमेट्रिक डाटा' वाले पासपोर्ट जारी करने में असमर्थता जताई है.

इस तरह के पासपोर्ट पर फ़ोटो के साथ-साथ उंगलियों की छाप भी होती है.

नई व्यवस्था में शामिल किए गए अन्य देश हैं- अंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्रुनेई, डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, आइसलैंड, आयरलैंड, इटली, जापान, लिचेंस्टाइन, लग़्ज़म्बर्ग, मोनाको, नीदरलैंड्स, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, सैन मैरिनो, सिंगापुर, स्लोवीनिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड और स्विट्ज़रलैंड.

कई देशों, ख़ासकर लातिन अमरीकी देशों ने उंगली छाप लेने की व्यवस्था की आलोचना की है.