पहली बार यह राज़ खुला है कि इराक़ के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन अपने एक रिश्तेदार और निजी अंगरक्षक की वजह से ही अमरीकी सैनिकों की गिरफ़्त में आए.
यह पहला मौक़ा है जब दुनिया को पता चल रहा है कि सद्दाम हुसैन आख़िर किस वजह से पकड़े गए.
बीबीसी के एक विशेष कार्यक्रम पैनोरमा ने यह राज़ खोला है कि मोहम्मद इब्राहीम उमर अल मुसलित ने अमरीकी सैनिकों को सद्दाम हुसैन के छिपने के ठिकाने का पता बताया था.
"रजुल अल समीन" यानी मोटे आदमी के नाम से पुकारे जाने वाला शख़्स सद्दाम हुसैन का भरोसेमंद और बहुत करीबी अंगरक्षक था.
![]() सद्दाम की गिरफ़्तारी कुछ इस तरह हुई |
अमरीकी सैनिकों ने इस अंगरक्षक को गिरफ़्तार किया और पूछताछ में उसने सद्दाम हुसैन के छिपने के लिए ज़मीन के नीचे बने गुप्त कक्ष का पता बता दिया.
इसके बाद 13 दिसंबर को सद्दाम हुसैन को उनके गृहनगर तिकरित के एक टूटे-फूटे मकान के नीचे बनी खंदक से निकालकर गिरफ़्तार कर लिया गया.
जब अमरीकी सैनिक हमले के बाद बग़दाद में दाख़िल हुए थे तो सद्दाम हुसैन के साथ जो लोग भागे थे उनमें यह अंगरक्षक भी शामिल था.
बीबीसी के इस कार्यक्रम में विस्तार से बताया जाएगा कि किस तरह सद्दाम हुसैन के इस अंगरक्षक ने अपनी गिरफ़्तारी के कुछ ही घंटों के भीतर आसानी से उनका पता बता दिया.
इनाम
मुसलित को गिरफ़्तारी के बाद तिकरित ले जाया गया जहाँ उससे पूछताछ की गई जिसमें उसने सद्दाम हुसैन के ठिकाने का राज़ खोल दिया.
![]() बीबीसी ने सद्दाम की गिरफ़्तारी के बारे में गहरी पड़ताल की है |
छह सौ अमरीकी सैनिकों ने उस फार्म को घेर लिया जहाँ सद्दाम हुसैन के छिपे होने की बात कही गई थी लेकिन उन्हें वहाँ कोई नहीं मिला.
काफ़ी तलाश के बाद सद्दाम हुसैन को ज़मीन के नीचे बने एक गड्ढे से बाहर निकाला गया.
सद्दाम हुसैन का पता बताने वाले को ढाई करोड़ डॉलर का इनाम देने की घोषणा की गई थी लेकिन अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि मुसलित को यह रक़म नहीं दी जाएगी.
अमरीकी सेना के मेजर जनरल रे ओडिर्नो ने कहा है कि यह रकम अमरीका किसी को नहीं देगा क्योंकि मुसलित ने अपनी मर्ज़ी से सद्दाम का पता नहीं बताया था.
जनरल ओर्डिनो ने इस बात को ग़लत बताया कि मुसलित को यातनाएँ दी गईं थीं.
सद्दाम को पकड़वाने वाले व्यक्ति के बारे में अमरीकी सैनिक अधिकारी ने इतना ही बताया था कि "वह एक मोटा अधेड़ आदमी है."
लेकिन बीबीसी के पैनोरमा कार्यक्रम की रिपोर्टर जेन कॉर्बिन ने सद्दाम हुसैन के कुछ क़रीबी लोगों से इस बात की पुष्टि कर ली कि मुसलित ने ही सद्दाम हुसैन का पता बताया था.
मुसलित सद्दाम हुसैन की सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते रहे थे और वे सद्दाम हुसैन के फ़िदायीन दस्ते से भी जुड़े थे.
सद्दाम हुसैन के क़रीबी लोगों ने बीबीसी को बताया कि आख़िरी दिनों में सिर्फ़ मुसलित को ही पता होता था कि वे कहाँ छिपे हैं.