अरब देशों ने अमरीका द्वारा शेख यासीन की हत्या पर इसराइल के ख़िलाफ़ निंदा प्रस्ताव को वीटो किए जाने की कड़ी आलोचना की है.
अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन के आध्यात्मिक नेता शेख़ यासीन की हत्या की निंदा के प्रस्ताव को वीटो कर दिया.
सुरक्षा परिषद के ज़्यादातर सदस्यों ने इसराइल के ख़िलाफ़ लाए गए निंदा प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया लेकिन अमरीका ने इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया.
इसराइल ने मिसाइल हमला करके सोमवार को ग़ज़ा पट्टी में शेख़ यासीन की हत्या कर दी थी.
अमरीका ने इस प्रस्ताव को एकतरफ़ा बताया, अमरीका का कहना था कि इस प्रस्ताव में चरमपंथी संगठनों की बात भी की जानी चाहिए.
प्रस्ताव रखने वाले देश अल्जीरिया के प्रतिनिधि ने कहा कि "मध्य पूर्व के मामलों में सुरक्षा परिषद नाकाम रहने के लिए अभिशप्त है."
इस प्रस्ताव में सोमवार की घटना को "ताज़ा इसराइली ग़ैरक़ानूनी हत्या" क़रार दिया गया और आम नागरिकों पर हमले और विध्वंस की कार्रवाइयों की निंदा की गई.
इस प्रस्ताव के समर्थन में ग्यारह सदस्यों ने वोट डाला जो कि बहुमत से अधिक था लेकिन अमरीका ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर प्रस्ताव को वीटो कर दिया.
ब्रिटेन, जर्मनी और रोमानिया ने प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
'ग़लत संकेत'
संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीन के प्रतिनिधि नासर अल-किदवा ने कहा कि लाखों लोगों ये समझना मुश्किल होगा कि आख़िर ये हुआ क्या है.
संयुक्त राष्ट्र में अल्जीरिया के दूत अब्दुल्ला बाली ने कहा कि "इस प्रस्ताव को नाकाम करके सुरक्षा परिषद दुनिया को ग़लत संकेत दे रहा है, दुनिया भर में इस हत्या की निंदा हुई है."
उन्होंने कहा कि इससे इसराइल को यह संकेत मिला है कि वह कुछ भी करने के लिए आज़ाद है.
अब यह संभव है कि इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भेजा जाए जहाँ किसी के पास प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार नहीं है.
अंतर ये है कि सुरक्षा परिषद में पारित किए गए प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय क़ानून का दर्जा मिल जाता है जबकि महासभा के प्रस्ताव का सिर्फ़ सांकेतिक महत्व है.
इससे पहले भी अमरीका इसराइल के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद में लाए गए कई प्रस्तावों को वीटो कर चुका है.
अमरीकी रवैया
इसराइली कार्रवाई की दुनिया भर में निंदा हुई थी और लाखों नाराज़ फ़लस्तीनी सड़कों पर उतर आए थे.
इसराइल ने अपनी कार्रवाई को न सिर्फ़ सही ठहराया था बल्कि शेख़ यासीन की हत्या करने में सफलता हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने सैनिकों को बधाई भी दी थी.
इसराइल का कहना था कि शेख़ यासीन कई आत्मघाती हमलों की साज़िश रचने में शामिल थे और वे "सबसे बड़े आतंकवादी" थे.
संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के राजदूत डैन गिलरमैन का बच्चों के आत्मघाती हमलों के बारे में कहना था कि शांति तब तक कायम नहीं होगी जब तक फ़लस्तीनी अपने बच्चों से प्यार कम और इसराइलियों से घृणा ज़्यादा करते रहेंगे.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के दूत जॉन नेग्रोपोंट ने कहा, "इसराइल की कार्रवाई से ग़ज़ा और पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा है लेकिन घटनाओं को पूरे परिदृश्य में देखना चाहिए."
उन्होंने कहा, "प्रस्ताव हमास की आतंकवादी कार्रवाइयों के बारे में चुप है इसलिए यह एकतरफ़ा और असंतुलित है."