http://www.bbcchindi.com

ब्रिटेन और लीबिया एकजुट हुए

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने लीबिया के नेता मोअम्मार गद्दाफ़ी से मुलाक़ात की है.

इस मुलाक़ात को लीबिया की अंतरराष्ट्रीय समुदाय में वापसी की शुरुआत माना जा रहा है.

क़रीब साठ साल बाद किसी ब्रितानी प्रधानमंत्री ने लीबिया की यात्रा की है.

पिछले साल दिसम्बर में महाविनाश के हथियार छोड़ देने के लीबिया के निर्णय और लॉकर्बी बम के पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा के बाद यह संभव हो सका है.

ब्लेयर ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली के पास एक टेंट में गद्दाफ़ी से मुलाक़ात की.

उन्होंने कहा कि कर्नल गद्दाफ़ी ने यह माना कि अल क़ायदा के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों की लड़ाई में वह भी साथ खड़े हैं.

इधर ब्लेयर ने गद्दाफ़ी से मुलाक़ात की है, दूसरी तरफ़ ऊर्जा क्षेत्र की दुनिया के विशालकाय कंपनी शेल ने लीबिया में तेल और गैस के एक बड़े ठेके पर दस्तख़त किए हैं.

ब्रिटेन ने लीबिया के साथ अपने कूटनीतिक संबंध 20 साल पहले ख़त्म कर लिए थे.

आश्वासन

दरअसल ब्रिटेन गद्दाफ़ी से आश्वासन चाहता है कि महाविनाश के हथियार छोडने को लेकर वह गंभीर हैं.

हालाँकि लीबिया जाने से पहले उन्होंने कहा कि वे एक ख़तरा उठा रहे हैं जो उन्हें लगता है कि उठाना चाहिए.

इटली और स्पेन के प्रधानमंत्री, दोनों टोनी ब्लेयर से पहल, कर्नल ग़द्दाफ़ी से हाथ मिला चुके हैं.

टोनी ब्लेयर ने अमरीका के साथ मिलकर लीबिया पर लगे प्रतिबंध समाप्त कराने का ज़ोरदार प्रयास भी किया है, और अमरीका इस ओर क़दम बढ़ा रहा है.

दो दिन पहले अमरीका के एक उच्च अधिकारी ने, 30 वर्षों के बाद, लीबिया की राजधानी त्रिपोली की यात्रा की है.

गठबंधन की चर्चा

ब्लेयर की इस यात्रा के दौरान लीबियाई अधिकारी दोनों देशों का आतंकवाद के विरुद्ध गठबंधन बनाने की चर्चा भी कर रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार लोगों के लिए चौंकाने वाली बात हो सकती है, लेकिन जहाँ तक कर्नल ग़द्दाफ़ी की बात है, वे ओसामा बिन लादेन की शैली वाले मुस्लिम चरमपंथ के, न केवल विरोधी हैं, बल्कि इसे अपनी सत्ता के लिए ख़तरा भी मानते हैं.

इधर ब्रितानी अधिकारी लीबिया की सुरक्षा सम्बन्धी चिन्ताओं को दूर करने के लिए, उसकी सेना को प्रशिक्षण देने, और अपने व्यावसायिक हितों को बढ़ाने के लिए, हथियार बेचने की बातें कर रहे हैं.