यूरोपीय आयोग ने बाज़ार में अपने प्रभुत्व का नाजायज़ फ़ायदा उठाने के आरोप में कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट पर भारी जुर्माना लगाया है. माइक्रोसॉफ़्ट को अपने उत्पादों को प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के लिए खोलने के भी निर्देश दिए हैं.
माइक्रोसॉफ़्ट के ख़िलाफ़ यूरोपीय आयोग के फ़ैसले में क्या है?
सबसे पहले तो 49.7 करोड़ यूरो (61.3 करोड़ डॉलर) का जुर्माना जो कि यूरोपीय आयोग द्वारा लगाई गई अब तक कि सबसे बड़ी जुर्माना राशि है. हो सकता है कि 53 अरब डॉलर संपत्ति वाली कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट पर इसका कोई ख़ास असर नहीं पड़े, लेकिन उसे आयोग की इस माँग से चिंता होगी कि वह अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को प्रतिद्वंद्वी सॉफ़्टवेयर कंपनियों के लिए खोल दे.
यूरोपीय आयोग ने माइक्रोसॉफ़्ट से दरअसल क्या करने को कहा है?
माइक्रोसॉफ़्ट से कहा गया है कि वह बाज़ार में विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम का वो टाइप भी उतारे जिसमें पहले से विंडोज़ मीडिया प्लेयर नहीं लगा हो.
माइक्रोसॉफ़्ट पर आरोप है कि वह ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ ख़ुद के ऑडियो-वीडियो प्लेयर लगा कर बाज़ार में अपने प्रभुत्व का ग़लत फ़ायदा उठा रहा है.
आयोग चाहता है कि मीडिया प्लेयर का बाज़ार खुला रहे ताकि उपभोक्ताओं के पास अपनी पसंद की कंपनी का प्लेयर चुनने की गुंजाईश हो.
लेकिन इससे भी आगे माइक्रोसॉफ़्ट को आयोग ने अपने इस निर्देश से चोट दी है कि वह अपने प्रतिद्वंद्वियों को विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम के कोड उपलब्ध कराए ताकि वे अपने सॉफ़्टवेयर को विंडोज़ के अनुरूप ढाल सकें.
माइक्रोसॉफ़्ट क्या करेगा?
कंपनी ने पहले ही फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की घोषणा कर रखी है.
मामला कब तक खिंच सकता है?
सब कुछ तय होते-होते सात साल तक लग सकते हैं. मामले के इस चरण तक आने में ही चार साल लग चुके हैं. पहले माइक्रसॉफ़्ट कंपनी यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ फ़र्स्ट इंस्टांस, और फिर यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में अपील कर सकती है.