अमरीका में ग्यारह सितंबर को हुए हमलों की सुनवाई कर रहे आयोग के सामने विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल गवाही दे रहे हैं.
आयोग अल क़ायदा के ख़तरों के प्रति अमरीकी सरकार के रवैए को लेकर सुनवाई कर रहा है.
पॉवेल ने आयोग को बताया है कि राष्ट्रपति बुश उनके अन्य साथियों ने जिस दिन से काम संभाला था उसी दिन से उन्हें यह जानकारी थी कि आतंकवाद एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है.
व्हाइट हाउस ने आतंक-विरोधी मसलों पर राष्ट्रपति के सलाहकार रिचर्ड क्लार्क के आरोपों का खंडन किया है.
रिचर्ड ने आरोप लगाए थे कि राष्ट्रपति अल क़ायदा के ख़तरों की अनदेखी करके इराक़ के पीछे प़डे हुए थे.
इससे पहले पूर्व विदेश मंत्री मेडलिन अलब्राइट ने गवाही दी थी.
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट से बुधवार को पूछताछ होगी.
नवंबर 2002 में गठित ये स्वतंत्र आयोग दो दिन तक गवाहियाँ लेगा.
आयोग के अध्यक्ष थॉमस कीन ने कहा है,"ये हमारी सबसे महत्वपूर्ण सुनवाई होगी और हम पिछली दो सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों से ये पूछेंगे की उन्होंने देश के सामने आने वाले सबसे बड़े ख़तरे से निबटने के लिए क्या किया".
बुश पर आरोप
इससे पहले सोमवार को बुश के एक पूर्व सलाहकार रिचर्ड क्लार्क ने ये आरोप लगाया कि अमरीकी राष्ट्रपति ने अल क़ायदा के बढ़ते ख़तरों की परवाह नहीं कर इराक़ पर ध्यान केंद्रित किया.
रिचर्ड क्लार्क को भी बुधवार को आयोग के समक्ष पेश होना है.
इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने बुश का बचाव किया है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉट मैकलेलन ने ये कहते हुए क्लार्क के आरोप को राजनीतिक अवसरवाद की संज्ञा दी है कि ये आरोप नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव को ध्यान में रखकर लगाए गए हैं.
अमरीका के उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने कहा है कि रिचर्ड क्लार्क को अपने व्हाइट हाउस के कार्यकाल के दौरान कई बातों का पता ही नहीं चला.
उन्होंने क्लार्क की कार्यकुशलता पर भी सवाल उठाए.