अमरीका ने हमास नेता शेख़ अहमद यासीन की हत्या के बाद इसराइल की फ़लस्तीनी चरमपंथियों को निशाना बनाने की नीति की आलोचना की है.
अमरीकी विदेश मंत्रालय ने अपील की है कि सबको सब्र से काम लेना चाहिए और शांति बनाए रखनी चाहिए.
जहाँ फ़लस्तीन में इस हत्या के बाद रोष प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं दुनिया में कई संगठनों और सरकारों ने इस घटना की व्यापक निंदा की है.
रूस ने कहा है कि इसराइली कार्रवाई से हिंसा का नया दौर शुरु होने का ख़तरा है.
यूरोपीय संघ के कई देशों ने भी इसकी निंदा की है. फ़्रांस ने इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन बताया है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जैक स्ट्रॉ ने भी कहा है कि इस इसराइली कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता और इससे इसराइल को कोई फ़ायदा नहीं होगा.
शेख़ यासीन की हत्या को पड़ोसी देश जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला ने एक आपराधिक कार्रवाई बताया है और कहा है कि इससे मध्य पूर्व में हिंसा और अस्थिरता बढ़ेगी.
इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति की रक्षा सलाहकार कॉन्डोलिज़ा राइस ने इसराइली कार्रवाई की योजना की जानकारी होने से इनकार किया है. उन्होंने मध्य पूर्व में सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा ने शेख़ यासीन की हत्या को सरकारी आतंकवाद की संज्ञा दी है और मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने इसे कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया है.
फ़लस्तीनियों का ग़ुस्सा
फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास का कहना था कि इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने इससे 'नरक के दरवाज़े खोल दिए हैं.'
फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने इस घटना की भर्त्सना करते हुए फ़लस्तीन में तीन दिन के शोक की घोषणा की है.
फ़लस्तीन के प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने इसे ख़तरनाक और कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया.
यासिर अराफ़ात के फ़तह संगठन की सैनिक शाखा अल-अक्सा मार्टेयर्स ब्रिगेड ने इसराइल पर हमला बोल दिया है.
इस संगठन का कहना है कि कुछ ही घंटों के भातर जवाबी कार्रवाई की जाएगी.
फ़लस्तीन के मुख्य वार्ताकार साएब अराकात ने कहा है कि इससे हिंसा के दौर में तेज़ी आएगी और फ़लस्तीनियों का गुस्सा बढ़ेगा.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस घटना के बाद रोडमैप के नाम से जानी जाती मध्य पूर्व शांति योजना के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग जाएगा.