अयमन अल ज़वाहिरी को अल क़ायदा संगठन में ओसामा बिन लादेन का दाहिना हाथ कहा जाता है.
अमरीका ने 2001 में जिन 22 वांछित चरमपंथियों की सूची जारी की थी उनमें लादेन के बाद ज़वाहिरी दूसरे नंबर पर थे.
वैसे कुछ जानकार बताते हैं कि ज़वाहिरी को दूसरे नंबर पर होने से ही उनके महत्व को कम करके नहीं आँका जाना चाहिए.
अफ़ग़ानिस्तान युद्ध के बाद से अल क़ायदा के पैसे की व्यवस्था और उसका सारा हिसाब-किताब ज़वाहिरी की ही ज़िम्मेदारी में था.
मिस्र के रहने वाले ज़वाहिरी पेशे से आँखों के डॉक्टर हैं और उन्होंने मिस्र में इस्लामिक जिहाद नाम के चरमपंथी संगठन के गठन में अहम भूमिका निभाई.
कुछ जानकार तो ये भी बताते हैं कि ज़वाहिरी के संगठन ने 1990 में अल क़ायदा से हाथ मिलाने के बाद उस पर एक तरह से क़ब्ज़ा ही कर लिया.
भूमिगत
बताया जाता है कि ज़वाहिरी को आख़िरी बार अक्तूबर 2001 में अफ़ग़ानिस्तान के ख़ोस्त शहर में देखा गया था.
अफ़ग़ानिस्तान से तालेबान की सत्ता ख़त्म होने के बाद से वे भूमिगत हो गए.
कई बार ये भी कहा गया कि वे या तो उत्तरी अफ़्रीका या मध्य पूर्व में कहीं भाग गए मगर अमरीकी अधिकारी यही मानते रहे कि वे अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाक़ में कहीं छिपे हैं.
प्रतिष्ठित परिवार
ज़वाहिरी का जन्म 1951 में मिस्र के एक ऐसे मध्यवर्गीय परिवार मे हुआ जिसमें कई लोग डॉक्टर और दूसरे क्षेत्रों के विद्वान थे.
ज़वाहिरी के दादा रबी अल ज़वाहिरी अरब जगत में इस्लाम के अध्ययन के केंद्र, काहिरा के अल अज़हर विश्वविद्यालय के प्रमुख इमाम थे.
अयमन अल ज़वाहिरी पहली बार 15 साल की उम्र में गिरफ़्तार हुए और उन्हें पकड़ा गया अरब जगत के सबसे पुराने कट्टरपंथी संगठन, मुस्लिम ब्रदरहुड, के साथ जुड़ने के कारण.
1974 में काहिरा के मेडिकल कॉलेज से उन्होंने स्नातक की उपाधि हासिल की और चार साल बाद यहीं से सर्जरी में मास्टर्स की डिग्री.
उनके पिता इसी कॉलेज में फार्माकोलॉजी के प्रोफ़ेसर थे. 1995 में उनकी मृत्यु हो गई.
राजनीति
1981 में काहिरा में एक परेड के दौरान राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या के मामले में कुछ अन्य कट्टरपंथी इस्लामी चरमपंथियों के साथ-साथ डॉक्टर ज़वाहिरी पर भी मुक़दमा चलाया गया था.
उन्हें हथियार रखने का दोषी पाया गया और उन्हें तीन साल की सज़ा हुई.
जेल से बाहर आकर वे सऊदी अरब चले गए.
यहाँ से वे पाकिस्तान के शहर पेशावर और फिर अफ़ग़ानिस्तान के लिए निकल पड़े जहाँ उन्होंने इस्लामी जिहाद की शुरूआत की.
वे 1970 और 1980 के दशक में सोवियत क़ब्ज़े के वक़्त अफ़ग़ानिस्तान में ही थे.
1999 में मिस्र की एक अदालत ने उनकी अनुपस्थिति में ही उन्हें मौत की सज़ा सुनाई.
कहा जाता है कि दागिस्तान में चरमपंथियों का साथ देने के आरोप में उन्हें रूस में भी छह महीने हिरासत में रखा गया.
पश्चिमी निशाने
समझा जाता है कि डॉक्टर ज़वाहिरी ने 1990 की दशक के शुरू में डेनमार्क और स्विट्ज़रलैंड में समय बिताया जहाँ वे नक़ली पासपोर्ट पर गए.
एक वीडियो कैसेट में वे लादेन के साथ बैठे दिखते हैं जिसमें वे अमरीका को चेतावनी देते हैं.
ज़वाहरी ये चेतावनी मिस्र के निवासी शेख उमर अब्दुल रहमान को छोड़ने के लिए देते हैं जिन्हें 1993 के विश्व व्यापार केंद्र बमकांड के सिलसिले में पकड़ लिया गया था.
फिर 1998 में उनका नाम लादेन के उन पाँच सहयोगियों के रूप में सामने आया जिन्होंने अमरीकी नागरिकों की हत्या के लिए 'फ़तवा' जारी किया था.
और भी कई मामलों में उनका नाम सामने आया है.
उनका नाम उन कुछ ऐसे लोगों में लिया जाता है जिनकी सैटेलाइट फ़ोन पर हुई बातचीत से पता चला कि 1998 में कुछ अमरीकी दूतावासों पर हमले के पीछे ओसामा बिन लादेन का हाथ था.