पिछले छह साल से बिछुड़ी माँ-बेटी का मिलन हो गया है. बिछुड़ने के समय बच्ची की उम्र मात्र दस दिन थी.
अमरीका की लुज़ैदा केवास के मकान में 1997 में जब आग लगी तो सबको लगा कि उनकी दस दिन की बच्ची उसमें जल कर मर गई है.
लेकिन माँ का दिल न माना. उन्हें इस बात की हैरानी थी कि राख में बच्ची के कोई अवशेष नहीं मिल पाए.
छह साल तक वह बच्ची के विछोह में व्याकुल रहीं.
और फिर अभी पिछले महीने वह एक बच्ची के जन्मदिन समारोह में शामिल हुईं तो वहाँ मौजूद एक बच्ची उनके आकर्षण का केंद्र बन गई.
उन्होंने अपनी बहन से कहा, "देखो, इस बच्ची के गाल पर भी वैसे ही गड्ढा पड़ता है जैसा मेरी बच्ची के पड़ता था".
"मेरा मन कह रहा है कि यह मेरी ही बच्ची है".
बहन ने इसे उनका वहम बताया लेकिन लुज़ैदा आश्वस्त नहीं हुईं.
उन्होंने बच्ची को अपने पास बुलाया और यह कहते हुए उसके बाल की एक लट काट ली कि उसके बालों में चुईँग गम चिपका हुआ है.
बाद में बालों के डीएनए परीक्षण से पता चला कि यह उनकी अपनी ही बच्ची है.
राज़ खुला कि उनकी ही एक रिश्तेदार ने बच्ची का अपहरण करके मकान में आग लगा दी थी.
छह साल तक वह बच्ची को इस परिवार की आँखों से बचाए रही लेकिन होनी को कौन टाल सकता है.
माँ ने अपने मन की आँखों से बच्ची को पहचान ही लिया.
घरवालों की तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं है लेकिन परेशानी इस बात को लेकर है कि वह बच्ची जो छह साल तक किसी और को अपनी माँ समझती रही, अब इस नए माहौल से समझौता कर पाएगी?