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इराक़ में अंतरिम संविधान पर सहमति

अमरीका और ब्रिटेन ने इराक़ी शासकीय परिषद में इराक़ के अंतरिम संविधान पर सहमति का स्वागत किया है.

अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने इसे बहुत बड़ी उपलब्धि कहा है जबकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इसे नए इराक़ के गठन की आधारशिला कहा है.

इराक़ी शासकीय परिषद के सदस्यों ने भी अंतरिम संविधान को ऐतिहासिक कहा है.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा है कि इससे इराक़ के भविष्य का रास्ता साफ़ हुआ है.

इस्लाम की भूमिका और कुर्द इलाकों को स्वायत्तता के मुद्दे पर कई दिनों की तनावपूर्ण बहस के बाद आख़िर इराक़ के अंतरिम संविधान पर सहमति बन गई.

हालांकि अमरीकी प्रशासक ने इराक़ के अंतरिम संविधान पर सहमति के लिए जो समय सीमा तय की थी उसके भीतर यह संभव नहीं हो सका.

हालांकि यह संक्रमण काल के लिए प्रशासनिक क़ानून ही होगा जो इराक़ मे चुनाव होने तक ही लागू रहेगा और उसके बाद चुनी हुई सरकार देश के लिए संविधान के निर्माण का काम करेगी.

लेकिन अमरीकी नेतृत्व वाली सेना को और इराक़ियों के प्रतिनिधित्व वाले अंतरिम प्रशासन में शामिल लोगों को लगता है कि इस अंतरिम संविधान में जो कुछ शामिल हो जाएगा वह बहुत हद तक मुख्य संविधान में भी बना रहेगा.

बीबीसी के संवाददाता जो फ़्लों का कहना है कि इसी वजह से इस पर बहस बहुत तनावपूर्ण रही और आशा से ज़्यादा लंबी चलती रही.

इस्लाम राष्ट्रीय धर्म

अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर ने इसके लिए शनिवार की समय सीमा तय की थी.

अंतरिम प्रशासन के प्रवक्ता के अनुसार बहस के बाद तय हुआ है कि इस्लाम इराक़ का राष्ट्रीय धर्म होगा और अंतरिम संविधान का आधार इस्लाम ही होगा हालांकि संविधान का यह एकमात्र आधार नहीं होगा.

कुर्द इलाक़ों की स्वायत्तता को भी मंज़ूरी दे दी गई है लेकिन इस स्वायत्त इलाक़े के इराक़ राज्य के साथ संबंध कैसे होंगे यह निर्णय चुनकर आने वाले शासकों को तय करना होगा.

इराक़ के दूसरे इलाक़ों को भी अपनी स्थानीय सरकार स्थापित करने का मौक़ा दिया जाएगा.

पूरे संविधान को अभी मंज़ूरी नहीं दी गई है. संभावना है कि बुधवार को या उसके बाद इसे मंज़ूरी दी जाएगी.