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ईरान में मतदान निष्पक्ष नहीं: अमरीका

अमरीका ने शुक्रवार को ईरानी संसद के लिए हुए मतदान की कड़ी आलोचना की है.

अमरीका का कहना है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं थे और उसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों की अनदेखी की गई है.

इससे पहले विवादों और कई गुटों के बहिष्कार की अपील के बीच मतदान संपन्न हो गया और अब मतगणना भी शुरू हो चुकी है.

लेकिन देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला ख़ामनेई की अपील के बीच मतदान का समय कई बार बढ़ाया गया.

वैसे 2500 सुधारवादी उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतरने से रोकने के बाद से चुनाव काफ़ी विवादित हो गए थे.

और मतदान से पहले ही सुधारवादी पार्टियों का एक बड़ा तबका हार स्वीकार कर चुका है. उनका कहना है कि इस तरह के चुनाव में जीत की अपेक्षा कैसे की जा सकती है.

वर्ष 2000 के चुनाव में सुधारवादी पार्टियों के गठबंधन ने ज़बरदस्त जीत हासिल की थी.

कट्टरपंथियों और सुधारवादियों के दावे के बीच चुनाव कितना प्रतिशत हुआ यह अभी नहीं पता चल पाया है.

आलोचना

दूसरी ओर अमरीका ने ईरान में हुए मतदान की कड़ी आलोचना की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन हुआ है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता एडम इरेली ने अपनी आलोचना में कई मुद्दों का ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही दो सुधारवादी अख़बारों को बंद करा दिया गया.

यहाँ तक कि सबसे बड़ी सुधारवादी पार्टी का कार्यालय भी बंद करा दिया गया.

इरेली ने बड़ी संख्या में सुधारवादी उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे माहौल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की कैसे उम्मीद की जा सकती है.

शुक्रवार को हुए मतदान का कई बुद्धिजीवियों और पत्रकारों ने भी बहिष्कार किया और लोगों से भी बहिष्कार की अपील की.

इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला ख़ामनेई ने भी मतदाताओं से वोट डालने का आग्रह किया.

उन्होंने चुनाव का बहिष्कार करने वालों को देश का दुश्मन क़रार दिया.

कई बार मतदान का समय बढ़ाया गया और तर्क यह दिया गया कि बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के लिए आने के कारण ऐसा करना पड़ा.