ईरान के संसदीय चुनाव में मतगणना शुरु हो गई है.
महत्वपूर्ण है कि मतदान का समय कई बार बढ़ाया गया है और इस तरह मतदाताओं को मत डालने के लिए कुछ घंटे का अतिरिक्त समय दिया गया.
ईरान में सुधारवादियों को चुनाव से बाहर रखने के विवादास्पद फ़ैसले के बाद सबका ध्यान इस ओर लगा हुआ है कि चुनाव में कितने लोगों ने भाग लिया.
ईरान के सुधारवादियों का मानना है कि चुनावों में कट्टरपंथियों को बहुमत मिलना लगभग तय है क्योंकि सुधार समर्थक कोई 2300 लोगों के चुनाव लड़ने पर पहले ही रोक लगा दी गई थी.
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला ख़ामनेई ने भी मतदाताओं से वोट डालने का आग्रह किया.
उन्होंने चुनाव का बहिष्कार करने वालों को देश का दुश्मन क़रार दिया.
उधर ईरान के सरकारी रेडियो ने कहा कि मतदान का समय इसलिए बढ़ाना पड़ा क्योंकि बहुत अधिक संख्या में लोग मतदान में भाग लेने पहुँचे थे.
'क्रांति विरोधी'
शुक्रवार के आम चुनाव में अपना वोट डालने के बाद ख़ामनेई ने कहा, "ईरानी राष्ट्र और क्रांति के विरोधी लोगों को मतदान करने से रोकने की हर कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता इन उत्साही युवकों को उनके कर्तव्य पूरा करने से रोका जा सकेगा."
सुधारवादियों में सबसे बड़ी पार्टी पार्टिसिपेशन फ़्रंट ने चुनाव में भाग नहीं लिया क्योंकि इसके कई बड़े नेताओं को चुनाव लड़ने के अयोग्य क़रार दिया गया था.
प्रतिबंध का आदेश कट्टरपंथियों की सुप्रीम काउंसिल की तरफ़ से आया था.
देश के प्रमुख बुद्धिजीवियों और पत्रकारों ने लोगों से मतदान के बहिष्कार की अपील की थी.
बीबीसी के तेहरान संवाददाता जिम मोयर के अनुसार चुनाव परिणामों में दिलचस्पी इस बात को लेकर होगी कि मतदाता राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी समर्थक सुधारवादी उम्मीदवारों का साथ देते हैं या नहीं.