मध्य पूर्व में पश्चिमी तट पर बन रहे इसराइली सुरक्षा घेरे की वैधानिकता को लेकर इसराइसी सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई कर रहा है.
ये मामला इसराइल के मानवाधिकार संगठनों ने दायर किया है.
इन संगठनों का दावा है कि ये सुरक्षा घेरा अवैध है क्योंकि यह क़ब्ज़े की ज़मीन पर बनाया जा रहा है.
इस मसले पर ऐसे समय सुनवाई हो रही है जब कुछ ही हफ़्तों बाद अंतरराष्ट्रीय अदालत में भी इस बाड़ की वैधानिकता पर विचार होना है.
रविवार को एक इसराइली अधिकारी ने कहा था कि अमरीका और फ़लस्तीनियों की चिंताओं को देखते हुए सुरक्षा बाड़ का रास्ता कुछ बदला जा सकता है.
इसराइल का कहना है कि पश्चिम तट से फ़लस्तीनी आत्मघाती हमलावरों को इसराइल में घुसने से रोकने के लिए ये सुरक्षा घेरा बहुत ज़रूरी है.
वहीं फ़लस्तीन का कहना है कि ये उसकी ज़मीन हड़पने और फ़लस्तीन के गठन के रास्ते में रोड़े अटकाने की एक कोशिश है.
मानवाधिकार संगठन 'द सेंटर फ़ॉर द डिफ़ेन्स ऑफ़ द इंडिविज़ुअल ऐंड द एसोसिएशन फ़ॉर सिविल राइट्स इन इसराइल' का कहना है कि इस घेरे का निर्माण पश्चिमी तट पर इसराइली सीमा के अंदर होना चाहिए.
"अभी जो घेरा बन रहा है वह अधिकतर पश्चिमी तट में है और हज़ारों फ़लस्तीनियों की ज़िंदग़ी में मुश्किलें खड़ी कर रहा है. ये घेरा लगभग 720 किलोमीटर की दूरी में बनाए जाने का प्रस्ताव है.
बदलाव संभव
इस बीच इसराइली अधिकारियों ने कहा है कि सुरक्षा घेरे के रास्ते में कुछ बदलाव किया जाएगा.
माना जा रहा है कि घेरे को लगभग 100 किलोमीटर तक कम किया जा सकता है.
![]() इसराइली सुरक्षा घेरा सैकड़ों किलोमीटर की दूरी में बन रहा है |
उधर इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के सलाहकार ज़ल्मान शोवाल ने कहा कि अगले हफ़्ते एक अमरीकी दूत वहाँ आ रहे हैं और प्रस्तावित बदलाव उनके सामने रखे जाएँगे.
यरूशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता रिचर्ड मायन ने कहा है कि भले ही ये बदलाव हो जाएँ मगर इससे इस घेरे का विरोध करने वालों की आवाज़ दबने वाली नहीं है.
फ़लस्तीनी कैबिनेट मंत्री जमाल शोबाकी का कहना है कि अगर इस घेरे ने भावी फ़लस्तीन की एक भी सेंटीमीटर ज़मीन पर आने की कोशिश की तो फ़लस्तीनी प्रशासन इसका विरोध करेगा.
उधर फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरेई ने पद सँभालने के बाद से पहली बार विदेश का दौरा शुरू किया है और वे इस घेरे का विरोध करने वालों का समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं.