इराक़ में तैनात अमरीकी सैनिकों के लिए यह दोहरी भूमिका निभाने की तरह है.
ये प्रशिक्षित सैनिक रात में गश्त लगाते हैं, छापे मारते हैं, अमरीका के ख़िलाफ़ कार्रवाई में लगे लोगों को तलाशने की कोशिश करते हैं और सड़कों के किनारे लगाए गए बमों से भी निपटते हैं.
छापे के दौरान ये लोगों के घरों के दरवाज़े तक तोड़ देते हैं. कभी-कभी उन्हें भारी गोलीबारी का भी सामना भी करना पड़ता है.
लेकिन दिन में 82वीं बटालियन के जवानों को भले लोगों की भूमिका निभानी होती है.
बग़दाद के दक्षिण पूर्व में अल योसिफ़िया के पास दो गाँवों में मैंने उनको लोगों का दिल जीतने की कोशिश करते हुए देखा.
इस कंपनी के पास लोगों के लिए तरह तरह के तोहफ़े थे.
कंबल, कोट और बूढ़ों को ठंड से बचाने के लिए हीटर तक.
बच्चों के लिए उनके पास पेंसिल हैं, कॉपियाँ हैं और किताबें भी लेकिन बच्चों की रुचि फ़ुटबॉल में ज़्यादा दिखती है.
वे दिन में सैनिकों से ज़्यादा सांता क्लॉज़ की तरह व्यवहार करते हैं और हर किसी को तोहफ़े बाँटते नज़र आते हैं.
पैसा भी- इलाज भी
चार्ली कंपनी के कमांडर के पास लोगों को देने के लिए बहुत सारा पैसा भी होता है.
पानी की सफ़ाई करने वाले एक प्लाँट का जेनरेटर सुधारने के लिए 900 डॉलर मिल जाते हैं तो किसी को एक स्कूल की मरम्मत के लिए सौ-सौ के दस नोट भी मिल जाते हैं.
![]() इराक़ियों का दिल जीतने के इलाज भी करने को तैयार हैं सैनिक |
पर क्या लोगों पर इतना भरोसा कर लिया जाए.
इसका भी उपाय है. एक सैनिक डिजिटल कैमरा निकाल कर फ़ोटो खींचता है और कहता है कि अगर काम नहीं हुआ तो वे उसे ढूंढ़ निकालेंगे.
अमरीकी कहते हैं, ''इराक़ में युद्ध के बाद स्थिति दुरुस्त करने का यह सीधा तरीक़ा है.''
इतना भर नहीं है.
इस टुकड़ी के साथ एक डॉक्टर भी है. अपने अत्याधुनिक चल चिकित्सालय के साथ.
वह मुफ़्त में उन ग्रामीणों का इलाज करता है जिनको इसकी ज़रुरत है.
इन सबका मक़सद एक ही है, इराक़ियों का दिल जीतना और यह साबित करने की कोशिश करना कि अमरीकी उनके दोस्त की तरह उनकी मदद को आए हैं कब्ज़ा जमाने नहीं.
चार्ली कंपनी को मालूम है कि रात को दरवाज़े तोड़ना और दिन में दिल जीतने की कोशिश करना आसान नहीं है.
सार्जेंट मार्क वार्ड कहते हैं, ''हमें दोनों करना पड़ रहा है, रंगीन पेंसिलें बाँटना भी और लात मारकर दरवाज़े तोड़ना भी.''