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अमरीका और ब्रिटेन पर जाँच का दबाव

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश इराक़ पर हमले से जुड़ी ख़ुफ़िया जानकारियों की जाँच की घोषणा करने वाले हैं. इधर ब्रिटेन में प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर पर भी ऐसी जाँच के लिए दबाव बढ़ रहा है.

बुश प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जाँच की घोषणा इसी सप्ताह की जाएगी.

वहीं ब्रितानी सरकार का कहना है कि वह जल्दी ही इस बात की घोषणा करेगी कि इस बारे में उठ रही शंकाओं के समाधान के बारे में सरकार क्या कर रही है.

सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति बुश जाँच के लिए एक आयोग नियुक्त कर सकते हैं जिसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट प्रतिनिधियों के अलावा स्वतंत्र विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा.

आयोग से अगले साल रिपोर्ट देने के लिए कहा जाएगा.

इधर ब्रितानी प्रधानमंत्री ब्लेयर ने इराक़ पर हमले की जो वजहें बताई थीं वे अमरीकी राष्ट्रपति बुश के कारणों की तरह नहीं होकर इराक़ के मौजूदा और ख़तरनाक हथियारों को लेकर थीं.

अभी तक इराक़ के पास से किसी तरह के हथियार नहीं मिले हैं इसलिए ख़ुफ़िया जानकारी के बारे में जाँच के लिए ब्रिटेन सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.

वहीं सरकार का कहना है कि इराक़ में हथियारों की तलाश कर रहे विशेषज्ञों की अंतिम रिपोर्ट आने का इंतज़ार करना चाहिए.

मगर इस रुख़ पर कायम रहना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है.

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्टों में कहा गया था कि इराक़ के पास रासायनिक और जैविक हथियार हैं.

इन्हीं सूचनाओं के आधार पर अमरीका, ब्रिटेन और साथी देशों ने इराक़ पर हमला किया था.

दबाव

अमरीका के पूर्व हथियार निरीक्षक डेविड के के बयान के बाद अमरीकी सरकार पर इस जाँच के लिए दबाव बढ़ रहा था.

डेविड के
डेविड के ने ख़ुफ़िया सूचनाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए थे

डेविड के ने कहा था कि हो सकता है कि इराक़ में महाविनाश के हथियार न हों.

अमरीकी संसद में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ही दबाव डाल रहे थे कि एक स्वतंत्र आयोग से इसकी जाँच करवाई जाए.

बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता के अनुसार राष्ट्रपति बुश इस आयोग का गठन कर इराक़ मामले के चुनावी मुद्दा बनने से रोकना चाहते हैं.

अमरीका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं.

ब्रिटेन में भी विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी सरकार से ख़ुफ़िया सूचनाओं की जाँच कराने की माँग कर रही है.

पार्टी नेता माइकल हावर्ड ने युद्ध से पहले तो इसका समर्थन किया था मगर अब वह कह रहे हैं कि इस बारे में कुछ ग़लतियाँ हुई हैं और ऐसी ग़लतियाँ भविष्य में नहीं हों इसकी व्यवस्था होनी चाहिए.