ईरान की सबसे बड़ी सुधारवादी पार्टी 'इस्लामिक पार्टिसिपेशन फ़्रंट' ने कहा है कि वह इस महीने होने वाले संसदीय चुनावों में हिस्सा नहीं लेगी.
फ़्रंट ने यह घोषणा कट्टरपंथियों की संस्था शूरा-ए-निगहबान के उस निर्णय ने विरोध में की है जिसके तहत उनकी पार्टी के बहुत से सदस्यों के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई है.
पार्टी के नेता मोहम्मद रज़ा ख़ातमी ने कहा है कि वो इन चुनावों के स्वतंत्र और निष्पक्ष होने की उम्मीद छोड़ चुके हैं.
उन्होंने घोषणा की है कि उनका दल कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा करेगा.
ईरान में 20 फरवरी को आम चुनाव होने हैं.
'इस्लामिक पार्टिसिपेशन फ़्रंट' के लगभग सभी उम्मीदवारों को चुनावों में खड़ा करने पर रोक लगा दी है.
इसमें मोहम्मद रज़ा ख़ातमी भी शामिल है. वो खुद संसद के उपाध्यक्ष हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बिना फ़्रंट के उम्मीदवारों के कट्टरपंथी उम्मीदवार बिना किसी मुक़ाबले के जीत जाएँगे और संसद पर उनका नियंत्रण हो जाएगा.
सुधारवादियों का सन् 2000 से संसद पर नियंत्रण है और वे इसकी मदद से सामाजिक और राजनीतिक सुधार के लिए दबाव बनाने में सफल रहे हैं.
मामला
कट्टरपंथी मुसलमानों की संस्था शूरा-ए-निगहबान ने लगभग तीन हज़ार प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दे दिया है.
इसमें से अधिकतर सुधारवादी हैं और ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी के समर्थक माने जाते हैं.
चुनाव में प्रतिबंधों का सुधारवादी सांसद कड़ा विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसके तहत लगभग 80 सांसदों को फिर से चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा दिया गया है.
संसद में पारित इस विधेयक के अनुसार जो लोग पिछला चुनाव लड़े थे वे एक बार फिर चुनाव में भाग्य आजमा सकते थे.