ब्रिटेन सरकार के पूर्व हथियार विशेषज्ञ डॉक्टर डेविड केली की आत्महत्या के कारणों की जाँच करने वाले हटन आयोग ने ब्लेयर सरकार को बरी कर दिया है.
मगर आयोग ने इस पूरे प्रकरण में बीबीसी की भूमिका की आलोचना की है.
लॉर्ड हटन ने बुधवार को 739 पृष्ठों की रिपोर्ट पेश की जिसमें उन्होंने कहा कि ब्लेयर सरकार पर लगाए गए तमाम आरोप 'निराधार' पाए गए.
उन्होंने बीबीसी संवाददाता एंड्रयू गिलिगन को पूरे विवाद की जड़ में बताते हुए बीबीसी की संपादकीय नीति की भी आलोचना की.
उन्होंने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत में कहा कि वे इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि डॉक्टर केली ने ख़ुद अपनी जान ली.
आरोप निराधार
लॉर्ड हटन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गिलिगन की रिपोर्ट में सरकार पर लगाए गए आरोप 'निराधार' साबित हुए.
इस रिपोर्ट में गिलिगन ने कहा था कि इराक़ पर हमले के लिए तैयार किए गए दस्तावेज़ में सरकार ने ख़ुफ़िया जानकारियों को बढ़ा चढ़ाकर बताया गया.
गिलिगन की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा था कि सरकार का यह दावा ग़लत है कि इराक़ में महाविनाश के हथियार 45 मिनट में तैयार किए जा सकते हैं.
बाद में बताया गया कि गिलिगन की रिपोर्ट के सूत्र डॉ डेविड केली थे.
लॉर्ड हटन ने कहा है कि वे इस बात से आश्वस्त हैं कि गिलिगन से डॉ केली ने यह नहीं कहा होगा कि '45 मिनट' वाली बात सरकार ने जानबूझ कर जोड़ी होगी.
ख़ामियाँ
लॉर्ड हटन ने कहा है कि गिलिगन की रिपोर्ट प्रसारित होने से पहले बीबीसी प्रबंधन ने आरोपों की पूरी तरह से जाँच नहीं की.
उन्होंने कहा है कि इस मामले में बीबीसी की संपादकीय नीति में खामियाँ थीं.
लॉर्ड हटन ने कहा कि बीबीसी के गवर्नरों ने इस मामले पर पूरा ध्यान न देकर ग़लती की.
उनका कहना था कि गिलिगन के स्रोतों की पूरी तरह जाँच करनी चाहिए थी.
रणनीति नहीं
लॉर्ड हटन ने कहा है कि डॉक्टर केली का नाम मीडिया को ज़ाहिर करने के पीछे सरकार की कोई गुप्त रणनीति नहीं थी.
उन्होंने कहा कि वे इस बात से संतुष्ट हैं कि डॉक्टर केली का नाम सामने आने के बाद सरकार अधिकारियों ने उनकी सहायता करने के लिए कुछ क़दम उठाए.
उनका कहना है कि बाद में रक्षा मंत्रालय ने जिस तरह मामले से निपटने की कोशिश की वह ग़लत था.
लॉर्ड हटन का कहना था कि जिस तरह अंतिम क्षणों में डॉ केली को बताया गया कि उनका नाम सार्वजनिक किया जा रहा है वह डॉ केली के लिए अपमानजनक था.
उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टर केली ने सरकारी कर्मचारियों की आचार संहिता का पालन नहीं किया.
उन्होंने कहा कि इराक़ में महाविनाश की क्षमता वाले हथियार के बारे में सरकार के सितंबर 2002 के दस्तावेज़ को लेकर काफ़ी बहस हुई. इसमें ये चर्चा हुई कि सैनिक कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए दस्तावेज़ में दिए गए कारण पर्याप्त और विश्वसनीय थे या नहीं.
लॉर्ड हटन ने कहा कि इस बात का फ़ैसला करना उनकी जाँच के दायरे में नहीं था.
रिपोर्ट लीक
हटन आयोग की रिपोर्ट आने से पहले ही ब्रिटेन के सन अख़बार ने इस रिपोर्ट की बातें प्रकाशित कर दी थीं जिसके बाद मीडिया में ये बात फ़ैल गई.
लॉर्ड हटन ने अपनी रिपोर्ट पढ़ने के बाद इसके मीडिया में पहले ही लीक हो जाने पर खेद प्रकट किया.
उन्होंने कहा कि वह यह पता लगाएंगे कि सन अख़बार और इस रिपोर्ट को लीक करने वाले सूत्रों के ख़िलाफ़ क्या क़ानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
इससे पहले रिपोर्ट की कॉपियाँ तीनों संबंधित पक्षों - डॉक्टर केली के परिवार, सरकार और बीबीसी - को मंगलवार को ही सौंप दी गई थी.
तीनों ही पक्षों ने ये वायदा किया था के वे रिपोर्ट के सार्वजनिक किए जाने से पहले इसकी बातों को किसी को नहीं बताएँगे.
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी रिपोर्ट लीक होने पर अफ़सोस जताते हुए कहा है यह रिपोर्ट उनके दफ़्तर से लीक नहीं हुई है.
हटन आयोग
पिछले वर्ष ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने डेविड केली के आत्महत्या करने के बाद इस संबंध में जाँच के लिए हटन आयोग का गठन किया था.
हटन आयोग ने पिछले वर्ष 25 सितंबर तक अपनी सुनवाई की और जिन 74 गवाहों के बयान लिए उनमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और रक्षा मंत्री ज्यौफ़ हून से लेकर बीबीसी के बड़े अधिकारी शामिल थे.
59 वर्षीय डॉक्टर डेविड केली ने पिछले साल जुलाई में सरकार और बीबीसी के बीच छिड़े विवाद में अपना नाम खिंचने के बाद आत्महत्या कर ली थी.
बीबीसी और ब्रिटिश सरकार के बीच इस मुद्दे पर विवाद शुरू हुथा था कि इराक़ में लड़ाई के लिए जाने के अपने फ़ैसले को सही ठहराने के लिए सरकार ने इराक़ की सैन्य क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था.
डॉक्टर केली ने 1991 से 1998 के बीच इराक़ में हथियार निरीक्षक के तौर पर काम किया था.