ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की सरकार को संसद में एक मतविभाजन में जीत मिली है.
मतदान कॉलेज ट्यूशन फ़ीस के नए सरकारी फ़ॉर्मूले को लेकर हुआ था.
सरकार के पक्ष में 316 और विरोध में 311 मत पड़े.
कुल 72 लेबर सांसदों ने अपनी ही पार्टी की सरकार के प्रस्ताव के ख़िलाफ़ मत दिया है.
छह घंटों की बहस के बाद यूनिवर्सिटी की फ़ीस बढ़ाने के मुद्दे पर मतदान हुआ.
उपप्रधानमंत्री जॉन प्रेस्कॉट उन सांसदों को मनाने में लगे हुए थे जो सरकार के इस फ़ैसले से नाराज़ हैं और उन्होंने कह दिया था कि यूनिवर्सिटी की फ़ीस बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार की हार भी हो सकती है.
टोनी ब्लेयर सरकार ने यूनिवर्सिटी की फ़ीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. प्रस्ताव लागू होने के बाद यूनिवर्सिटी छात्रों से प्रति वर्ष 3000 पाउंड तक की फ़ीस ले सकेंगे.
इस फ़ीस के लिए छात्रों को बैंकों से कर्ज के रुप में मिलेगा और उन्हें यह फ़ीस तब लौटानी होगी जब वे हर साल 15,000 पाउंड कमाने लगेंगे.
आम लोगों का कहना है कि जनता के टैक्स का इस तरह उपयोग करना उचित नहीं है.
तमाम विरोधों के बावजूद टोनी ब्लेयर इस प्रस्ताव पर अड़े हुए थे.
बीबीसी के राजनीतिक संवाददाता का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाता तो टोनी ब्लेयर के नेतृत्व पर सवाल उठ सकता था.
हटन आयोग की रिपोर्ट
ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुज़र रहे हैं और ट्यूशन फ़ीस विवाद के बाद अब उन्हें हटन रिपोर्ट का सामना करना पड़ेगा.
बुधवार को हटन आयोग की रिपोर्ट प्रकाशित होनी है.
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने लॉर्ड हटन आयोग को जाँच का आदेश तब दिया जब प्रख्यात वैज्ञानिक और इराक़ में हथियारों के बारे में ब्रिटेन के शीर्ष स्तर के विशेषज्ञ डॉक्टर डेविड केली ने आत्महत्या कर ली थी.
आत्महत्या के कुछ ही दिन पहले ही संसद की एक समिति ने उनसे कड़ी पूछताछ की थी.
डेविड केली से पूछताछ ये सामने आने के बाद की गई कि वे बीबीसी संवाददाता एंड्र्यू गिलिगन की एक रिपोर्ट के स्रोत थे जिसपर बाद में विवाद छिड़ा.
इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ब्लेयर सरकार ने दबाव डालकर इराक़ की सैनिक क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर बताने के लिए इस बारे में जारी किए गए दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ की थी.
इस रिपोर्ट की प्रति प्रधानमंत्री ब्लेयर को कुछ घंटों पहले दे दी जाएगी.
हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस रिपोर्ट से सरकार को कोई ख़तरा दिखता नहीं है लेकिन अगर इसमें टोनी ब्लेयर या उनकी सरकार पर प्रतिकूल टिप्पणी की जाती है तो लोकप्रियता घट सकती है.
लेकिन विश्लेषक इसे प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के लिए कठिन समय मानते हैं.