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सद्दाम को हटाना 'युद्ध की उचित वजह नहीं'

प्रमुख मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि इराक़ की 'क्रूर सत्ता' को हटाना वहाँ जंग छेड़ने का कोई वाजिब कारण नहीं हो सकता है.

संगठन के अनुसार अमरीका और ब्रिटेन युद्ध को सही ठहराने के लिए ये वजह बता रहे हैं जो ग़लत है.

संगठन का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए इसके पहले कोई क़दम क्यों नहीं उठाया?

ये रिपोर्ट उस समय आई है जब इराक़ में हथियार ढूँढ़ने के अमरीकी कार्यक्रम के प्रमुख ने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी के आकलन पर शंका जाहिर करते हुए कुछ ही दिन पहले इस्तीफ़ा दे दिया है.

इधर ब्लेयर पर भी काफ़ी दबाव है क्योंकि ब्रिटेन के एक हथियार विशेषज्ञ डेविड केली की मौत की परिस्थितियों की जाँच कर रहे आयोग की रिपोर्ट जल्दी ही आने वाली है.

ब्लेयर और बुश दोनों ही नेता इस समय आलोचनाओं के घेरे में हैं क्योंकि दोनों का ही दावा था कि सद्दाम हुसैन के पास व्यापक विनाश की क्षमता वाले हथियार थे जबकि ऐसा कुछ भी अभी तक किसी भी जाँच से साबित नहीं हो सका है.

न्यूयॉर्क स्थित इस संस्था ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में भी मानवाधिकार की स्थिति बिगड़ रही है.

इसके अलावा रूस का प्रशासन चेचन्या में युद्ध को आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध के नाम पर जायज़ ठहराने की कोशिश कर रहा है.

संस्था ने कहा है कि सद्दाम हुसैन का शासन क्रूर रहा होगा मगर इसे हटाने के लिए मार्च 2003 में जो रास्ता अपनाया गया वह ठीक नहीं ठहराया जा सकता.

संस्था के अनुसार, "बुश प्रशासन इराक़ में युद्ध को मानवीय हस्तक्षेप कहकर उचित नहीं ठहरा सकता और न ही टोनी ब्लेयर ऐसा कर सकते हैं."

उधर सोमवार को अमरीका के एक रेडियो को दिए साक्षात्कार में अमरीका के पूर्व प्रमुख हथियार निरीक्षक डेविड के ने इराक़ में व्यापक विनाश की क्षमता वाले हथियारों की मौजूदगी पर एक बार फिर संदेह जाहिर किया.

उनका कहना था कि इराक़ की ओर से ख़तरों के बारे में सीआईए ने जो चेतावनी अमरीकी राष्ट्रपति को दीं उसके बारे में उसे सफाई देनी चाहिए.