ईरान की संसद ने उदारवादी प्रत्याशियों पर लगा प्रतिबंध हटाने और चुनाव नियम बदलने वाला एक विधेयक पारित कर दिया है.
सांसदों की एक आपातकालीन बैठक में हस्तक्षेप का ये फ़ैसला लिया गया. अगले महीने होने वाले चुनाव में हज़ारों उदारवादियों के हिस्सा लेने पर कट्टरपंथियों की संस्था शूरा-ए-निगहबान ने प्रतिबंध लगा दिया था.
बदलावों के तहत जो लोग पिछला चुनाव लड़ सके थे वे एक बार फिर चुनाव में भाग्य आजमा सकेंगे मगर यदि उन्हें अयोग्य करार देने वाला कोई मज़बूत आधार होगा तब ऐसा नहीं होगा.
वैसे ये विधेयक पारित होने के बाद इसके कानून बनने की राह में मुश्किल ये है कि इसे फिर उसी शूरा-ए-निगहबान की सम्मति चाहिए होगी.
ईरान में मौजूद बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि ये देश के अब तक से सबसे बुरे राजनीतिक संकटों में से एक है. इसमें लगभग साढ़े तीन हज़ार लोगों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा है.
ईरान में 20 फरवरी को चुनाव होना है.
ये संकट जब से शुरू हुआ है उसके बाद ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खमेनेई ने भी हस्तक्षेप किया और तब कट्टरपंथियों की परिषद ने लगभग साढ़े तीन सौ लोगों को चुनाव में उतरने की अनुमति दे दी.
रविवार को हुए संसद के इस सत्र का रेडियो पर सीधे प्रसारण हुआ और इसे संसद ने 'तिहरे महत्त्व' का बताया है.
संवाददाताओं के अनुसार इस वर्ग में कोई विधेयक तभी पारित होता है जब संसद को लगता है कि देश के मूलभूत अधिकारों पर संकट है या देश में राजनीतक या सैनिक संकट है.
तेहरान में मौजूद बीबीसी संवाददाता मिरांडा एलेस का कहना है कि सांसद नए चुनाव कानून में दो अनुच्छेद जोड़ना चाहते हैं.
पहले संशोधन के तहत सभी सांसदों या पिछले चुनाव में मुक़ाबले में उतरे प्रत्याशी चुनाव लड़ सकेंगे.
दूसरे प्रस्ताव के अनुसार राजनीतिक विद्वेष के तहत किसी को चुनाव लड़ने से रोका नहीं जाना चाहिए.