सऊदी अरब के सर्वोच्च मुफ़्ती, शेख़ अब्दुल-अज़ीज़ अल-शेख़ उन महिलाओं से नाराज़ हैं जो एक सम्मेलन में पुरुषों के सामने बिना पर्दे चली गईं थीं.
उन्होंने कहा है कि ये शर्मनाक है और इसके गंभीर परिणाम होंगे.
सर्वोच्च मुफ़्ती ने कहा है कि इस्लामी शरीया क़ानून बग़ैर पर्दे वाली महिलाओं की स्पष्ट शब्दों में भर्त्सना करता है.
उनका कहना है कि शरीया के मुताबिक़, पुरुषों और महिलाओं का मिलना-जुलना सभी बुराइयों की जड़ है.
सर्वोच्च मुफ़्ती ने सऊदी अरब के शासकों को याद दिलाया है कि ख़ुद सऊदी अरब के संस्थापक इस बात के ख़िलाफ़ थे कि महिलाएँ अपना पर्दा हटा दें और अपने नज़दीकी रिश्तेदारों के अलावा दूसरे पुरुषों से मिले-जुलें.
नाराज़गी की वजह
दरअसल जद्दा में हुए उस आर्थिक सम्मेलन में सऊदी अरब की एक महिला उद्योगपति ने बिना पर्दा किए भाषण किया.
इससे मुफ़्ती शेख़ अल-शेख़ बहुत नाराज़ हैं.
उनकी नाराज़गी हाल में टेलीविज़न रिपोर्टों से भी है जिनमें बग़ैर पर्दे वाली महिलाओं की तस्वीरें दिखाई गई थीं.
उस महिला उद्योगपति लुबना अल ओलायान ने अपील की थी कि सऊदी अरब में महिलाओं को और अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए.
उनका कहना था कि परिवर्तन के बिना विकास नहीं हो सकता.
उनकी बात का दूसरी महिला प्रतिनिधियों ने भी समर्थन किया था.
सम्मेलन में पुरुषों और महिलाओं के बीच एक पर्दा लगाया गया था लेकिन महिलाएँ पुरुषों के बीच जाकर उनसे मिल जुल सकती थीं.
वहाँ के अख़बारों ने महिलाओं की तस्वीरें छापीं और कहा है कि यह सऊदी अरब में हो रहे परिवर्तन का प्रतीक है.
लेकिन मुफ़्ती इससे नाराज़ थे.
यह मामला तब उभरा है जब सऊदी अधिकारी सीमित सुधार कार्यक्रम लागू करने की योजना बना रहे हैं.
संवाददाताओं का कहना है कि लेकिन मुफ़्ती शेख़ अल-शेख़ के इस बयान से सऊदी अरब के राजघराने के लिए मुश्किलें पैदा हो जाएँगी.
उनका कहना है कि सऊदी राजघराने को एक तरफ़ तो ख़ुद को राज्य के संस्थापक सिद्धांत, शरीया की निगरानी करने वाले की भूमिका निभानी होती है.
दूसरी तरफ़ वो बदलाव के लिए अंदरूनी और बाहरी दबाव को भी और ज़्य़ादा नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता.