दुनिया भर से लोग रोज़ग़ार की तलाश में अमीर देशों का रुख़ कर रहे हैं और धनी देशों में जाने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है.
ऑर्गनाइज़ेशन फॉर इकॉनॉमिक कोऑपरेशन संस्था की रिपोर्ट में ये कहा गया है.
संस्था की नई रिपोर्ट के अनुसार लोगों का जाना अधिकतर मामलों में तो पारिवारिक कारणों से ही होता है मगर इस बढ़ोत्तरी की वजह रोज़ग़ार की वजह से लोगों का दूसरे देशों में जाना है.
ये एक ऐसी संस्था है जिसके सदस्य अधिकतर अमीर देश हैं.
संस्था ने एक आम निष्कर्ष ये निकाला है कि उसके सदस्य देशों में लोगों के आने का चलन बढ़ रहा है.
इस रिपोर्ट में दिए गए आँकड़े अधिकतर मामलों में तो वर्ष 2001 के हैं मगर कुछ आँकड़े उसके अगले वर्ष के भी हैं.
इसके अलावा विभिन्न देशों में तुलना करना कभी-कभी कठिन होता है क्योंकि ये तरीक़े किसी मानक के आधार पर नहीं हैं.
मगर फिर भी कुछ निष्कर्ष तो निकाले ही जा सकते हैं.
संस्था का कहना है कि उसके कई सदस्य देशों में आप्रवासी श्रमिकों को काम पर लेने को लेकर रुचि बढ़ी है.
रिपोर्ट के अनुसार एक वजह तो ये हो सकती है कि इन देशों में लोगों की औसत आयु बढ़ रही है और लोग सेवानिवृत्त हो रहे हैं उनकी ज़रूरतें भी बढ़ रही हैं मगर उन सेवाओं को देने वाले लोग कम हैं.
संस्था के अनुसार कई देश विदेशों के क्षमतावान लोगों की तलाश में हैं और विदेशी छात्रों को स्नातक के बाद स्थानीय तौर पर ही नौकरी दे रहे हैं.
इसके अलावा ये नौकरियाँ बहुत ही उच्च शिक्षा या क्षमता वाले लोगों को ही नहीं मिल रही हैं बल्कि कृषि, निर्माण और घरेलू मसलों से जुड़े क्षेत्रों में भी नौकरी दी जा रही है.
मगर इसके बावजूद सबसे अधिक संख्या उन लोगों की है जो परिजनों से मिलने जा रहे हैं.
इसके साथ ही शरण लेने वालों की संख्या भी बढ़ ही रही है और पहले वर्षों में इसकी संख्या भले ही कुछ ज़्यादा रही हो मगर अब इसकी दर कुछ कम है.